केंद्रीय मंत्री
नितिन गडकरी
आए दिन अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। कभी वह काम ना करने वाले को सबक सिखाने की बात कहते हैं तो कभी गाड़ियों के बारे में नई चीजें बताते हैं। इस बार उन्होंने बिना किसी पार्टी या नेता का नाम लिए जो कहा है उसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। रविवार को नागपुर में आयोजिक एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि जाति के आधार पर जिन लोगों को टिकट दिए गए, उसका कोई प्रमाण नहीं है कि उन लोगों ने अपने समाज के लिए कुछ किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे लोग कुछ समय बाद ही अपने घरवालों के लिए भी टिकट मांगने लगते हैं।
नितिन गडकरी ने समुदाय के सामाजिक विकास के लिए जातिगत पहचान के बजाय शिक्षा और कौशल को ज्यादा महत्वपूर्ण बताते हुए कई नसीहतें दे डालीं। नागपुर में चर्मकार सेवा संघ की ओर से आयोजित एक छात्र सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए बीजेपी के सांसद और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी ने कौशल हासिल करने पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि समाज की प्रगति शिक्षा पर निर्भर करती है।
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उन्होंने आगे कहा, 'अच्छी शिक्षा से रोजगार की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है और सामाजिक प्रगति हासिल की जा सकती है। लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में सम्मान मिलता है और समुदाय मुख्यधारा का हिस्सा बनता है। इसलिए चर्मकार समुदाय को भी विकास के लिए शिक्षा और कौशल पर ध्यान देना चाहिए।
गडकरी ने मचाई खलबली
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कई लोग जाति के आधार पर पार्टी टिकट मांगते हैंलेकिन समुदाय के लिए कुछ नहीं करते। बीजेपी के अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी ने कहा, ‘कई लोग मुझसे अपने समुदाय के लोगों को टिकट देने के लिए कहते हैं। वे कहते हैं कि हमें पार्षद, विधायक बना दीजिए। हालांकि, हमने जाति के आधार पर जिन लोगों को टिकट दिए, उनमें से किसी एक के भी बारे में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि उसने अपने समुदाय के कल्याण के लिए कुछ किया हो।’
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गडकरी ने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट मांगने की प्रवृत्ति की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘‘टिकट मिलने के बाद वे कहते हैं कि मेरी पत्नी, बेटे, बेटी को टिकट दीजिए। अगर चौथा व्यक्ति हो तो अपने पीए के लिए भी टिकट मांगते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जिसे चुनाव का टिकट मिले, वह समुदाय के विकास के लिए काम करेगा लेकिन, अपने 40 से 50 साल के अनुभव से मैंने यह महसूस किया है कि इसका कोई फायदा नहीं है।’
उनके इस बयान के बाद अलग तरह की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इसकी वजह है कि खुद बीजेपी में ही तमाम जातियों के नेताओं को टिकट दिए जाते रहे हैं। इतना ही नहीं, कई राज्यों में जाति के आधार पर बनी पार्टियों से बीजेपी का गठबंधन भी है।