कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत दी। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज तीन आपराधिक मामलों में पुलिस को 30 नवंबर तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद फिलहाल इन मामलों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर रोक रहेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर निर्देश जारी किया। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन आपराधिक मामलों को लेकर यह याचिका अदालत के समक्ष पहुंची थी। हाई कोर्ट के इस आदेश से उन्हें 30 नवंबर तक राहत मिल गई है। अदालत के निर्देश के मुताबिक इस अवधि के दौरान पुलिस अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगी। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत इस संबंध में अगला फैसला लेगी।
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तीन FIR में अभिषेक को राहत
कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन FIR में जबरन कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। यह सुरक्षा 30 नवंबर तक या अदालत के अगले आदेश तक जारी रहेगी। अदालत ने फिलहाल अभिषेक की हिरासत में पूछताछ को जरूरी नहीं माना है। यानी इस स्तर पर उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अदालत ने अभिषेक को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया है। उन्हें पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना होगा।
विदेश यात्रा नहीं करने का दिया निर्देश
हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा को लेकर भी स्पष्ट किया है। वह सुप्रीम कोर्ट से पहले मिली अनुमति के अनुसार विदेश यात्रा कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश में तय सभी शर्तों का पालन करना होगा। यानी हाई कोर्ट की ओर से दी गई यह राहत उनकी विदेश यात्रा की पहले से मिली अनुमति को प्रभावित नहीं करती। उन्हें जांच में सहयोग करने और अदालत के निर्देशों का पालन करने की शर्त के साथ यह सुविधा जारी रहेगी।
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न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पुलिस को निर्देश दिया कि 23 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई के दौरान तीनों मामलों की जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। बनर्जी को जांच में सहयोग करने और तीनों मामलों के संबंध में जारी किए गए नोटिस का पालन करने का निर्देश दिया गया। साथ ही इन मामलों में जांचकर्ताओं के सामने पेश होने के लिए बनर्जी को कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि बनर्जी जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो संबंधित पुलिस अधिकारी इस आदेश में बदलाव या इसे वापस लेने के लिए हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं।