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'मराठी नहीं तो लाइसेंस नहीं...', एक फैसले से ठप हो सकता है महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी बोलना, लिखना और पढ़ना अनिवार्य करने का फैसला फजीहत बन सकता है। ड्राइवरों का संगठन अब प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, File Photo Credit: PTI

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भारत में भाषाओं को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं। कहीं किसी भाषा को तरजीह मिलने पर विवाद होता है तो कहीं कोई खासा भाषा न बोल पाने वाला शख्स निशाने पर आ जाता है। ऐसा ही कुछ अब एक बार फिर से महाराष्ट्र में होने वाला है। मराठी भाषा को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले महाराष्ट्र में एक नया नियम लाया गया है जिसके चलते टैक्सी और ऑटो ड्राइवर परेशान हैं। महाराष्ट्र सरकार नए नियम लाई है जिनके तहत जो ऑटो और टैक्सी ड्राइवर मराठी भाषा बोल, पढ़ लिख और समझ नहीं पाएंगे उनका ड्राइविंग लाइसेंस कैंसल कर दिया जाएगा। अब महाराष्ट्र में काम करने वाले ड्राइवर इस नियम के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश और राजधानी मुंबई का ट्रांसपोर्ट सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसकी वजह है कि आधे से ज्यादा ड्राइवर दूसरे राज्यों के हैं और उन्हें मराठी भाषा या तो नहीं आती है या बहुत कम आती है।

 

सरकार के इस फैसले ने ऑटो-टैक्सी ड्राइवर की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल के लिए सरकार के लिए अनुरोध किया जा रहा है कि वह अपने इस फैसले पर विचार करे। अगर बात नहीं मानी जाती है तो इसके खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन भी किया जाएगा। ऑटोरिक्शा ड्राइवर-ओनर ज्वाइंट ऐक्शन कमेटी, महाराष्ट्र का कहना है कि अगर 1 मई से यह नियम लागू होता है तो 4 मई से पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया जाएगा।

 

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क्या है सरकार का नया फैसला?

महाराष्ट्र् के ट्रांसपोर्ट विभाग के नए नियमों के मुताबिक, जो भी कॉमर्शियल रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर ना तो मराठी पढ़ पाएगा, ना बोल पाएगा और ना लिख पाएगा तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस कैंसल किया जा सकता है। यह नियम 1 मई 2026 से लागू होना है। अब गाड़ी चलाने वालों को डर है कि इससे उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। 

 

यह फैसला आम लोगों के लिए भी समस्या बन जाएगा क्योंकि बड़ी संख्या में ऑटो-टैक्सी ड्राइवर दूसरे राज्यों के हैं और वे अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं। इस बारे में नवी मुंबई रिक्शा टैक्सी संयुक्त कृति समिति के जनरल सेक्रेटरी विजय पाटिल ने कहा है, 'ट्रांसपोर्ट विभाग ने फिर ऐसे लोगों को लाइसेंस दिया ही क्यों जो मराठी नहीं बोल पाते हैं? अब लोगों ने परमिट लेने के लिए मोटी रकम खर्च कर दी है तो विभाग उनके खिलाफ हो गया है।'

 

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इसी समिति के अध्यक्ष शशांक शरद राव कहते हैं, 'इस फैसले से लाखों ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट मंत्री ने यह फैसला सिर्फ एग्रीगेटर कंपनियों और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया है। मुंबई में 75 प्रतिशत टैक्सी ड्राइवर हिंदी बोलते हैं। पूरे महाराष्ट्र में 50 से 60 प्रतिशत ड्राइवर हिंदी होलते हैं। इस फैसले से इन सबकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।'

 

बता दें कि ये ड्राइवर महाराष्ट्र के शहरों में ऑटो के लाइसेंस के लिए 15 हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 5000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। परमिट और बैज के लिए भी पैसे खर्च होते हैं। ऐसे में अब ड्राइवरों को चिंता है कि अगर वे गाड़ी ही नहीं चला पाएंगे तो उनके ये पैसे भी बर्बाद हो जाएंगे।  

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