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'नीतीश को जिंदा दफनाने की ताकत किसी में नहीं', आनंद मोहन पर बरसीं लेसी सिंह

पूर्व सांसद आनंद मोहन के बयान पर पलटवार करते हुए जेडीयू नेता और मंत्री लेसी सिंह ने कहा है कि किसी में इतनी ताकत नहीं है कि वह नीतीश कुमार को जिंदा दफना सके।

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आनंद मोहन पर भड़क गईं लेसी सिंह, Photo Credit: ChatGPT

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बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके बेटे निशांत कुमार की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। पूर्व सांसद आनंद मोहन के हालिया बयान पर अब जनता दल (यूनाइटेड) ने आक्रामक तेवर अपनाए हैं। भवन निर्माण मंत्री लेसी सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए साफ कहा कि दुनिया में किसी के पास इतनी ताकत नहीं है जो हमारे नेता नीतीश कुमार को जिंदा दफन कर दे। इससे पहले आनंद मोहन ने कहा था कि ऐसा लग रहा है जैसे नीतीश कुमार को जिंदा ही दफन कर दिया गया हो।

 

अब इसी को लेकर लेसी सिंह ने दो टूक कहा कि नीतीश कुमार सिर्फ जेडीयू के नेता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का भरोसेमंद चेहरा हैं। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व पर सवाल खड़ा करना दरअसल बिहार की जनता के विश्वास को चुनौती देना है। बिहार सरकार की मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता और नेता नीतीश कुमार के हर फैसले के साथ मजबूती से खड़ा है और उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

लेसी सिंह ने क्या-क्या कहा?

उन्होंने आनंद मोहन के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी करने वाले लोग अपने ही राजनीतिक विवेक और नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लेसी सिंह ने कहा, 'हमारे नेता को चुनौती देना आसान नहीं है। बिहार की जनता ने बार-बार उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है और आज भी पूरा राज्य उनके साथ खड़ा दिखाई देता है।'

 

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इधर, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार की बढ़ती सक्रियता को लेकर भी जेडीयू ने विपक्ष पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार विकास और विश्वास की राजनीति की बात कर रहे हैं, जिससे विपक्ष में बेचैनी बढ़ गई है। जेडीयू नेताओं ने दावा किया कि विपक्ष को डर है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नया चेहरा प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।

विपक्ष पर भी भड़के JDU नेता

JDU प्रवक्ता निहोरा प्रसाद यादव ने आनंद मोहन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद पार्टी में नहीं हैं लेकिन उनके परिवार को जेडीयू ने राजनीतिक पहचान दी। उन्होंने कहा, 'अगर नीतीश कुमार नहीं होते तो आनंद मोहन आज जेल से बाहर नहीं होते। उनकी पत्नी को सांसद बनाया गया और बेटे को विधायक बनने का अवसर मिला। ऐसे में उन्हें मर्यादा में रहकर बयान देना चाहिए।' वहीं जेडीयू एमएलसी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव राजनीतिक विरासत के सहारे राजनीति कर रहे हैं, जबकि जेडीयू और नीतीश कुमार विकास के कामों के आधार पर जनता के बीच जाते हैं।

 

नीरज कुमार ने कहा, 'जिन लोगों ने 15 वर्षों तक सत्ता में रहकर बिहार को पिछड़ेपन और अव्यवस्था की ओर धकेला, वे आज जनता को अपने काम नहीं गिना पा रहे हैं। इसके उलट, नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले 20 वर्षों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं। जनता इन्हीं विकास कार्यों के आधार पर जेडीयू पर भरोसा कर रही है।'

 

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बिहार में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाज़ी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। खासकर निशांत कुमार की सक्रियता और नेतृत्व को लेकर शुरू हुई चर्चा ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जेडीयू इसे संगठन की मजबूती और नेतृत्व के प्रति विश्वास का संकेत बता रही है जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक उत्तराधिकार की तैयारी के रूप में देख रहा है। फिलहाल इतना तय है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में बयान, पलटवार और सियासी समीकरणों की गर्मी और बढ़ने वाली है।

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