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सैलरी से कटेंगे 5 लाख रुपये, नोएडा DM मेधा रूपम को क्यों देना पड़ रहा हर्जाना?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा DM मेधा रूपम की सैलरी से 5 लाख रुपये हर्जाना वसूलने का आदेश दिया है। यह मामला आकृति चौधरी पर NSA लगाने से जुड़ा है। जानिए क्या है पूरी बात।

Medha Roopam, Noida DM Medha Roopam

DM मेधा रूपम, Photo Credit-Social Media

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उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम की सैलरी से हर्जाने के तौर पर 5 लाख रुपये काटे जाएंगे। यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया था। आकृति चौधरी के अलावा,  लखनऊ के पूर्व पत्रकार-कार्यकर्ता सत्यम वर्मा पर भी NSA लगा था। दोनों पर सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग लेने जैसे आरोप लगे थे। 

 

अब इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी के NSA के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया। इसके साथ ही 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। हाई कोर्ट ने मुआवजा गौतम बुद्ध नगर की DM मेधा रूपम की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया है।

 

यह भी पढ़ें: 'BCI का आदेश अधिकारहीन', NALSAR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

क्या है पूरा मामला? 

दरअसल, 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन हुआ था, जिसमें हिंसा के आरोप लगे थे। इसी मामले में लखनऊ के पत्रकार सत्यम वर्मा और नोएडा की एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया। आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा पर सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग लेने जैसे आरोप लगे थे। इसके बाद आकृति को 11 अप्रैल को मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था। 

कोर्ट ने क्या कहा? 

कोर्ट ने कहा कि पूरा मामला एक Concocted Story यानी गढ़ी हुई कहानी पर आधारित था। कोर्ट ने कहा कि नोटिस तैयार होने से पहले ही आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया। बार-बार वीडियो सबूत मांगे जाने पर भी वह हिंसा भड़काने का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं हुआ, सरकार ने इसके लिए और समय मांगा। जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि अब और समय नहीं दिया जा सकता क्योंकि आकृति पहले से ही 5 महीने जेल में बिता चुकी हैं।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी, जो भी हिंसा हुई वह आकृति की गिरफ्तारी के बाद हुई। इसलिए हिंसा भड़काने का आरोप तर्कसंगत नहीं ठहरता। इन सभी खामियों के आधार पर कोर्ट ने NSA हिरासत रद्द करते हुए आकृति की तत्काल रिहाई का आदेश दिया।  

DM मेधा रूपम क्यों देंगी आकृति चौधरी को हर्जाना? 

इस मामले में कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी से पहले सही कानूनी प्रक्रिया (धारा 126) पूरी नहीं की गई थी। नोटिस तैयार होने से पहले ही आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया। यानी इस पूरी प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी हुई। इसके अलावा, सरकार हिंसा भड़काने का कोई ठोस वीडियो सबूत पेश नहीं कर पाई, जबकि हिंसा तो आकृति की गिरफ्तारी के बाद हुई थी। इस मामले में उन्हें जिम्मेदार ठहराना तर्कसंगत नहीं था।

 

ऐसे में कोर्ट ने पूरे मामले को गढ़ी हुई कहानी (concocted story) करार दिया, जिसके चलते एक निर्दोष छात्रा को 5 महीने जेल में रहना पड़ा।  जिले में इस तरह की गैरकानूनी कार्रवाई की अंतिम जिम्मेदारी DM की होती है। इसलिए कोर्ट ने DM मेधा रूपम को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराते हुए उनकी सैलरी से 5 लाख रुपये आकृति चौधरी को हर्जाने के तौर पर देने का आदेश दिया।


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