हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित गगल एयरपोर्ट के विस्तार से प्रभावित होने वाले परिवारों को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए जिन लोगों की जमीन और संपत्तियां प्रभावित हो रही हैं। उनमें पाकिस्तान से विस्थापित होकर हिमाचल में बसे करीब 60 से 70 परिवार भी शामिल हैं। इन परिवारों को भी सरकार की ओर से निर्धारित नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
गगल एयरपोर्ट के विस्तार की प्रक्रिया के तहत प्रभावित परिवारों की जमीन और संपत्तियों का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान से आए इन परिवारों को मुआवजे के दायरे में शामिल किया जाना उनके लिए महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है। अब इन परिवारों को मिलने वाले मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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16 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान
पाकिस्तान से लगभग 70-80 दशक पहले भारत आए इन परिवारों स्थानीय पंचायत की ओर से पंचायत देह आबादी नियम के तहत भूमि का आवंटन हुआ था लेकिन इन्हें इसका मालिकाना हक नहीं मिला था। लगभग 250 सदस्यों वाले इन परिवारों में सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार है। पंचायत की जमीन पर ये मकान बनाने के अलावा खेती-बाड़ी भी कर सकते हैं लेकिन अभी तक ऐसे परिवारों को भी भूमि के मालिकाना हक का प्रावधान नहीं है। हालांकि, हिमाचल सरकार स्वामित्व योजना लाने जा रही है जिसके तहत इन्हें भी जमीन का मालिकाना हक मिल सकता है। सरकार ने इनके लिए लगभग 16 करोड़ रुपए मुआवजे का प्रावधान रखा था।
विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक पवन काजल ने नियम-62 के तहत सदन में गगल के 70 परिवारों की बात रखी जो दशकों से सरकारी या पंचायत द्वारा देय जमीन पर रह रहे हैं लेकिन मुआवजे से वंचित हैं। साथ ही इस पर डिप्टी सीएम मुकेश अग्रिहोत्री ने ऐलान किया कि इन परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, आर एंड आर का भी लाभ दिया जाएगा। मुकेश अग्रिहोत्री का कहना है सरकार इन परिवारों के साथ है और उन्हें उनका हक हर हाल में दिलाया जाएगा।
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विधायक पवन काजल ने क्या कहा?
विधायक पवन काजल ने सदन में बताया कि गगल के यह परिवार दशकों से गगल में रह रहे हैं और अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं। इन परिवारों को इनका हक हर हाल में मिलना चाहिए। साथ ही प्रदेश के विकास में इनका अहम योगदान है और किसी न किसी रूप में हिमाचल की आर्थिकी में अपना योगदान भी दे रहे हैं। हाल ही में गगल के इन प्रभावित परिवारों ने डीसी कांगड़ा से भी मुलाकात की थी और अपनी समस्या से अवगत करवाया था। हालांकि, सरकार मुआवजा भी दे रही है लेकिन प्रभावितों में 60 से 70 परिवार ऐसे हैं जिन्हें न तो मुआवजा मिल रहा है और न ही आर एंड आर का लाभ।