logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बुजुर्गों को 5 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर ठगे 1.3 करोड़, घर में भी हो गई चोरी

UP की राजधानी लखनऊ में साइबर ठगों ने 5 दिन तक दो बुर्जुगों को डिजिटल अरेस्ट करके 1.30 करोड़ रुपये ठग लिए। इसी दौरान घर में भी चोरी हो गई।

ai generated image of old couple

प्रतीकात्मक फोटो, Photo Credit: ChatGPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

साइबर जालसाज अब डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों की जिंदगी भर की जमा पूंजी पर निशाना साध रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सामने आए दो मामलों में ठगों ने बुजुर्गों को पांच-पांच दिन तक वीडियो कॉल पर कैद जैसा रखा। उन्हें किसी से बात करने तक की इजाजत नहीं थी। कभी पुलिस, कभी एटीएस, सीबीआई और ईडी अधिकारी बनकर बैंक खातों में मनी लांड्रिंग की रकम होने का डर दिखाया गया। रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी ठग पूछताछ और गिरफ्तारी का दबाव बनाते रहे। दोनों बुर्जुगों से कुल 1.30 करोड़ की ठगी कर ली गई।

 

इंदिरानगर के ख्वाजापुर स्थित हरिनगर निवासी 75 वर्षीय रत्ना कौल को 13 अगस्त की दोपहर करीब 3 बजे वाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मुंबई के केनरा बैंक में खाता संचालित करने में हो रहा है। आरोप लगाया गया कि खाते से अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और मनी लांड्रिंग के लिए काम किया जा रहा है। रत्ना ने आरोपों से इन्कार किया तो उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई जेल भेजने की धमकी दी गई। इसके बाद कभी एटीएस तो कभी सीबीआई अधिकारी बनकर उनसे पूछताछ की गई।

 

जालसाजों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और किसी से बात नहीं करने की चेतावनी दी। इसी दौरान 78.50 लाख रुपये आरोपितों के बताए खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। साइबर ठगी का एहसास होने पर रत्ना ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उनके 22 लाख रुपये अलग-अलग खातों में फ्रीज करा दिए हैं।

 

यह भी पढ़ें: पशुधन विभाग के 600 करोड़ रुपये कौन निगल गया? यूपी में नया स्कैम

डिजिटल अरेस्ट के दौरान घर में हो गई चोरी

रत्ना कौल 13 से 17 अगस्त तक साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट में थीं। इसी दौरान चोरों ने उनके घर को भी निशाना बना लिया। 14 अगस्त की दोपहर चोर घर की बाउंड्री फांदकर अंदर घुसे। इसके बाद कमरे में रखी अलमारी का ताला तोड़कर लाखों रुपये के नकदी और जेवरात चोरी कर लिए। 20 अगस्त को जब रत्ना को साइबर ठगी का पता चला और उन्होंने सामान चेक किया तो चोरी का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्होंने 21 अगस्त को गाजीपुर थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

 

दूसरा मामला विकासखंड-3 निवासी 69 वर्षीय सेवानिवृत्त मर्चेंट नेवी कैप्टन मोहन लाल आहूजा का है। वह सिडनीम कॉलेज के प्रधानाचार्य रह चुके हैं। 16 अगस्त को उनके पास वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर जितेंद्र त्रिपाठी बताया।आरोप लगाया गया कि उनके आधार पर नया सिमकार्ड और डेबिट कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में किया गया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर डराया गया। एटीएस और ईडी का नाम लेकर भी धमकाया गया। वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई रुकवाने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट करना होगा।अगले दिन 20 अगस्त को जांच के नाम पर बताए गए खातों में 52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। 

 

यह भी पढ़ें: योगी सरकार का रसोइयों को बड़ा तोहफा, मानदेय बढ़ा, 5 लाख तक कैशलेस इलाज

पुलिस की निगरानी में आरोपी, खातों की जांच शुरू

पुलिस ने दोनों मामलों में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपितों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, वीडियो कॉल और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने साइबर ठगों के बताए खातों में भेजी गई रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई भी शुरू की है।पुलिस का कहना है कि कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें। ऐसी कॉल आने पर तुरंत कॉल काटें और साइबर अपराध की सूचना पुलिस को दें।

Related Topic:#UP News#Cyber Crime

और पढ़ें