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होर्मुज के बाहर भारत का वादीनार क्यों बना तेल का नया ट्रांसफर पॉइंट?

हॉर्मुज संकट में भारत का वादीनार गल्फ के तेल कारोबार का एक नया ट्रांसफर पॉइंट बना है। आइए जानते हैं यह बदलाव क्यों हुआ और इसका क्या फायदा होगा? 

Vadinar Port

वादीनार पोर्ट, Photo Credit- Social Media

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हॉर्मुज संकट के बीच कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (KPC)  के अधिकारियों ने सितंबर महीने की शुरुआत में एक बयान दिया था जिससे यह कयास लगाया जा रहा है कि भारत के लिए नया विकल्प सामने आ रहा।  KPC अधिकारियों ने कहा था कि वे होर्मुज के बाहर कच्चे और रिफाइन किए गए उत्पादों के लिए STS (शिप-टू-शिप) विकल्प दे रहे हैं। व्यापार के आंकड़ों से पता चला है कि ये ट्रांसफर आम तौर पर भारत के पश्चिमी तट पर वादीनार के पास होते हैं। अब इसका लाभ भारत को होगा या नहीं, आइए जानते हैं?

 

गुजरात के कच्छ की खाड़ी में स्थित वादीनार इस संकट के बीच गल्फ के तेल कारोबार का नया ट्रांसफर पॉइंट बना है। इससे यह साफ पता चलता है कि कैसे वैश्विक एनर्जी जियोपॉलिटिक्स में भारत एक बड़े रणनीतिक दावेदार के रुप में उभरा है। 

 

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वादीनार क्यों बना नया ट्रांसफर पॉइंट?

गुजरात के कच्छ की खाड़ी में स्थित वादीनार एक स्वाभाविक रूप से गहरा पानी वाला पोर्ट है। यह फारस की खाड़ी और हॉर्मुज स्ट्रेट से केवल कुछ दिनों की दूरी पर स्थित है। जब हॉर्मुज में तनाव की वजह से बीमा कंपनियां जहाजों का बीमा रद्द कर रही थीं, तब वादीनार एक सुरक्षित सेफ गार्ड के रुप में सामने आया। हॉर्मुज संकट के कारण वैश्विक कंपनियां अपने बड़े क्रुड कैरियर को सीधे जोखिम वाले क्षेत्रों में भेजने से कतराती है। बड़े जहाजों को इस क्षेत्र के पार ले जाने के बजाय गल्फ से निकलने वाले तेल को छोटे या मध्यम आकार के टैंकरों  के जरिए तेल का ट्रांसफर किया जा रहा है। वादीनार का पानी शांत और गहरा है जिसमें जो बड़े जहाजों को बिना पोर्ट पर लाए तेल का ट्रांसफर आसानी से और बिना किसी जोखिम के हो जाता है। 

 

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नुकसान से कैसे बचाया?

रिपोर्ट्स के अनुसार, संकट के इस दौर में लाखों बैरल कच्चा तेल वादीनार के ऑफशोर ऑपरेशन्स में ट्रांसफर हो चुका है। आंकड़ों के हिसाब से 600,000 बैरल से लेकर 20 लाख बैरल प्रति शिपमेंट तक का कार्गो वादीनार के रूट से प्रोसेस और ट्रांसफर किया जा रहा है। भारत केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा लॉजिस्टिक्स हब के रुप में उभरा है। यह बदलाव इस बात को सिद्ध करता है कि यह केवल तेल का खरीदार नहीं बल्कि पूरे हिंद महासागर के लिए एक एनर्जी री-रूटिंग सेंटर बन चुका है। वादीनार से तेल न केवल देश की रिफाइनरियों में जा रहा है बल्कि यहां से STS के जरिए तेल को रि-पैकेज करके एशिया और यूरोप की ओर जाने वाले अन्य टैंकरों पर भी लोड किया जा रहा है।


इस रूट का इस्तेमाल आगे भी किया जाएगा। बड़ी तेल कंपनियों को यह समझ आ गया है कि हॉर्मुज जैसी 'सिंगल-चोकपॉइंट' पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा है। वादीनार एक स्थायी 'एनर्जी ट्रांसशिपमेंट हब' के रूप में बना रहेगा।  जब-जब हॉर्मुज पर संकट बढ़ता है तब-तब वैश्विक तेल बाजार किसी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में रहते हैं। लेकिन 2026 के हॉर्मुज संकट में वादीनार ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक ऐसा वित्तीय और लॉजिस्टिक्स मॉडल तैयार कर दिया है जो बीमा का खर्च घटाता है और डिलीवरी को सुरक्षित बनाता है। वादीनार अब केवल भारत का एक पोर्ट नहीं है बल्कि यह हिंद महासागर में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का नया ठिकाना बन गया है। 

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