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हिमाचल प्रदेश: अब ‘कुल्लू’ या ‘किन्नौर’ नहीं, अपने नाम से बिकेगा पांगी का सेब

हिमाचल प्रदेश के पांगी में प्राकृतिक खेती से तैयार सेब को नई पहचान मिली है। CM सुक्खू ने ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड लॉन्च किया है। 

Himachal Pradesh News

पांगी ब्रांड सेब लॉन्च करते CM सुक्खू। (Photo Credit-DPR)

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अब पांगी घाटी के सेबों को बाजार में कुल्लू या किन्नौर के नाम की पहचान के सहारे नहीं बेचना पड़ेगा। दूरदराज जनजातीय क्षेत्र पांगी के सेब अब अपने ब्रांड ‘पांगी एप्पल’ के नाम से बाजार में उतरेंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित पांगी के सेबों के लिए इस ब्रांड को लॉन्च किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय बागवानी को अलग पहचान दिलाने के साथ किसानों को बाजार में अपनी उपज की विशिष्ट ब्रांडिंग का अवसर देना है।

 

अब तक पांगी घाटी में उत्पादित सेबों को दूसरे क्षेत्रों में बिक्री के लिए भेजते समय अक्सर ‘कुल्लू एप्पल’ या ‘किन्नौर एप्पल’ की ब्रांडिंग वाले कार्टन इस्तेमाल किए जाते थे। इससे पांगी में पैदा होने वाले सेब की अपनी भौगोलिक और व्यावसायिक पहचान सामने नहीं आ पाती थी। ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड के जरिए इसी कमी को दूर करने की कोशिश की गई है।

 

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550 मीट्रिक टन सेब उत्पादन की उम्मीद

पांगी घाटी में सेब बागवानी का दायरा लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, यहां करीब 370 हेक्टेयर भूमि पर सेब के 1,04,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। चालू सीजन में लगभग 550 मीट्रिक टन यानी करीब 35,000 पेटियां सेब उत्पादन होने की उम्मीद है।

 

इस उत्पादन को बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के लिए अलग ब्रांड के तहत पैकेजिंग की व्यवस्था की गई है। हालांकि, ब्रांड लॉन्च होने के साथ ही किसानों को बेहतर दाम मिलने की गारंटी नहीं है। इसके लिए बाजार तक पहुंच, गुणवत्ता, विपणन और खरीदारों की मांग भी महत्वपूर्ण होगी।

10 और 20 किलो के कार्टन, किसानों को 50 फीसदी अनुदान

राज्य सरकार ने ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड के लिए विशेष कार्टन तैयार करवाए हैं। ये 10 किलोग्राम और 20 किलोग्राम क्षमता में उपलब्ध होंगे। किसानों को इन कार्टन पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज की अलग पैकेजिंग करने में मदद मिलेगी। ब्रांडेड कार्टन के माध्यम से पांगी के सेबों को बाजार में एक समान पहचान के साथ उतारने और स्थानीय उत्पाद की पहचान मजबूत करने की योजना है।

 

किसानों के लिए इस पहल का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि पैकेजिंग केवल फल को सुरक्षित पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि बाजार में उसकी पहचान बनाने का जरिया भी है। यदि ब्रांड के साथ गुणवत्ता और विपणन की रणनीति भी प्रभावी रहती है तो पांगी के बागवानों को आगे चलकर नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल बना पांगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांगी उपमंडल को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है। राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है और ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड इसी प्रयास का हिस्सा है। सरकार की परिकल्पना पांगी को प्राकृतिक खेती के माध्यम से रसायन-मुक्त उपमंडल के रूप में विकसित करने की है।

 

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इस पहल को क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान देने से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार इस पहल से क्षेत्र के करीब 6,300 कृषक परिवारों की आजीविका मजबूत करने, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक उन्नति के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।

ब्रांडिंग से कितनी बदलेगी बागवानों की तस्वीर?

पांगी जैसे दुर्गम जनजातीय क्षेत्र में बागवानी केवल कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय का अहम आधार भी है। ऐसे में स्थानीय ब्रांड की शुरुआत किसानों के उत्पाद को बाजार में अलग पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, पांगी एप्पल की वास्तविक व्यावसायिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्रांड को बाजार में कितनी पहचान मिलती है, सेब की गुणवत्ता और आपूर्ति कितनी नियमित रहती है तथा किसानों को बिक्री के बाद कितना लाभ मिलता है। स्थानीय उत्पाद को ब्रांड पहचान मिलने से भविष्य में पैकेजिंग, परिवहन, विपणन और बागवानी आधारित छोटे उद्यमों के विकास की संभावनाएं भी बन सकती हैं। 


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