पश्चिमी एशिया में लगातार जारी संघर्ष का असर अब दिखने लगा है। सोमवार को शेयर मार्केट धड़ाम हो गया और लोगों के लाखों-करोड़ों रुपये डूब गए। उधर तेल और गैस की सप्लाई भी बाधित हो रही है। इस बीच महाराष्ट्र के पुणे में गैस से चलने वाला शवदाह गृह बंद कर दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि अब अगर किसी की मौत होती है तो उसे जलाने के लिए भी इंतजार करना पड़ सकता है। पुणे के सबसे बड़े वैकुंठ धाम को बंद कर दिया गया है क्योंकि लाशें जलाने के लिए जरूरी LPG गैस की कमी ही नहीं है। कुछ लाशों को बिजली की मदद से जलाया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया है कि वैकुंठ धाम में कुछ भट्टियां गैस से चलती हैं और कुछ बिजली से चलती हैं। अब गैस की कमी के चलते उन भट्ठियों को बंद कर दिया गया है जो गैस से चलती हैं। बिजली से चलने वाली भट्टियां ही काम कर रही हैं। पुणे नगर निगम (PMC) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर निलेश कालेकर ने बताया है कि सिर्फ एक-दो भट्ठियों में एकाध लाश जलाने भर की गैस बची है। उन्होंने यह भी बताया है कि एक लाश जलाने के लिए लगभग 18 किलो LPG की जरूरत पड़ती है।
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सिर्फ बिजली से जलेंगी लाशें
बता दें कि पुणे के नवी पेठ में स्थित यह वैकुंठ धाम शहर का सबसे बड़ा शवदाह गृह है। 17 एकड़ में फैले इस शवदाह गृह में हर दिन लगभग 20 लाशें जलाई जाती हैं। अब गैस की कमी के चलते नगर निगम ने एक नोटिस जारी किया है जिसमें बताया गया है कि अगली सूचना तक गैस के जरिए लाशों को जलाने का काम बंद रहेगा। गनीमत इतनी है कि बिजली के जरिए लाशों को जलाया जा सकेगा।
इससे पहले 5 मार्च को केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने एक निर्देश जारी किया था और कहा था कि घरेलू इस्तेमाल के लिए गैस की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। इसी निर्देश के अनुसार, जो प्रोपेन और ब्यूटेन गैस उपलब्ध है उसे पहले उन लोगों को दिया जाए जो अपने घर में गैस का इस्तेमाल करके खाना बनाते हैं। बाद में कमर्शियल इस्तेमाल वाले लोगों को गैस दी जाए।
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बीते कुछ दिनों से वैकुंठ धाम को LPG गैस मिली ही नहीं है जिसके चलते गैस से चलने वाली भट्ठियां बंद करनी पड़ी हैं। इसी वैकुंठ धाम में बिजली और लकड़ी वाली भट्ठियां भी हैं जिनमें लाशों को जलाया जा रहा है। बता दें कि पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के चलते भारत में गैस के दाम बढ़ गए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।