गणेश महोत्सव आने वाला है और महाराष्ट्र में इसकी तैयारियां जोरों-शोरों से शुरू हो गई हैं। खासकर पुणे और मुंबई में गणेश महोत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गणपति पंडालों से लेकर ढोल-ताशों और संगीत तक, पूरे शहर में त्योहार का माहौल देखने को मिलता है लेकिन इस बार गणेश महोत्सव से पहले तेज आवाज में बजने वाले डीजे और साउंड सिस्टम को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
पुणे के सैकड़ों निवासियों ने आगामी गणेश महोत्सव के दौरान तेज आवाज में संगीत और डीजे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अत्यधिक शोर के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका दावा है कि गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान होने वाले तेज शोर के कारण कई लोगों को दो से तीन दिन के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता है।
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साउंड सिस्टम के खिलाफ लगाए नारे
रविवार को पुणे के प्रमुख स्थल गुडलक कैफे चौक के पास सैकड़ों लोग एकत्र हुए और गणेश मंडलों में इस्तेमाल होने वाले तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस्तेमाल किए जा रहे अत्यधिक तेज ध्वनि वाले उपकरणों के कारण आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि यह विरोध किसी विशेष धर्म या जाति के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि शहर में किसी भी त्योहार के दौरान साउंड सिस्टम का अत्यधिक इस्तेमाल लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल ध्वनि प्रदूषण के अत्यधिक स्तर को कम करना है।
गणेश मंडलों ने जताई आपत्ति
गणेश मंडलों के प्रतिनिधियों ने डीजे और साउंड सिस्टम पर प्रतिबंध की मांग पर आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि तेज आवाज के मुद्दे पर केवल गणेश मंडलों को निशाना बनाया जा रहा है। एक गणेश मंडल के प्रतिनिधि ने कहा कि शहर में पर्यावरण प्रदूषण जैसी अन्य गंभीर समस्याएं भी हैं लेकिन उन पर उतनी चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने मुठा नदी में बढ़ते प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब नदी प्रदूषित हो रही है तो उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि केवल गणेश मंडलों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
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गणेश मंडलों ने लिया संकल्प
हालांकि, गणेश मंडलों की ओर से यह भी कहा गया है कि वे ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करेंगे। एक मंडल के सदस्य ने बताया कि गणेश मंडलों ने साउंड सिस्टम में प्रेशर-मिड और प्लाज्मा जैसे उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करने का संकल्प लिया है। इन उपकरणों के इस्तेमाल से ध्वनि की तीव्रता बढ़ सकती है।
मंडल के सदस्यों ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी गणेश मंडल प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। ऐसे में इस बार गणेश महोत्सव के दौरान पुणे में लोगों की ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं और गणेश मंडलों की परंपराओं के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।