पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र 22 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है, जिसमें भगवंत मान सरकार केंद्र की नीतियों और पंजाब के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में है। 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस सत्र में किसानों की मांगों, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संभावित असर और नदी जल बंटवारे जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं, विपक्ष ने भी सरकार को घेरने के लिए पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की हत्याएं, भ्रष्टाचार के आरोपों, सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सवाल उठाने की तैयारी की है। ऐसे में विधानसभा का यह सत्र सरकार और विपक्ष, दोनों के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
विशेष सत्र बुलाने में संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन की अहम भूमिका रही है। किसान संगठनों ने पंजाब के नदी जल समझौतों की समीक्षा, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की संबंधित धाराओं को निरस्त करने और बांध सुरक्षा कानून को वापस लेने की मांग उठाई थी। किसानों ने बीज विधेयक, 2025 का भी विरोध किया है। सरकार ने इन मांगों को विधानसभा में उठाने और केंद्र के सामने राज्य का पक्ष रखने का भरोसा दिया था।
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व्यापार समझौते पर चर्चा
किसान संगठनों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात और भारतीय किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। संगठन ने समझौते की शर्तों में पारदर्शिता और किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग की है। पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था में गेहूं और धान की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह मुद्दा राज्य सरकार के लिए भी संवेदनशील है। विधानसभा में सरकार इस विषय पर केंद्र से जवाब मांगने और किसानों की चिंताओं को सदन के माध्यम से सामने रखने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार कौन-सा औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगी, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
विपक्ष करेगा हंगामा
विधानसभा में आम आदमी पार्टी की सरकार को विपक्ष की ओर से भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। मानसा में परविंदर सिंह की हत्या के बाद पंजाब भर में विरोध हो रहे हैं। परिवार भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर अड़ गया है। नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने झोटा परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया है कि वह विधानसभा सत्र में उनका मुद्दा उठाएंगे। ऐसे में विपक्ष पंजाब में बढ़ते नशे और हत्याओं के मुद्दे पर मान सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा।
कर्मचारी कर रहे हड़ताल
विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले पंजाब के सरकारी कर्मचारी 21 और 22 अक्टूबर को दो दिवसीय सामूहिक अवकाश और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, लंबित महंगाई भत्ते और बकाया राशि का भुगतान, वेतन विसंगतियों को दूर करना तथा कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। विपक्ष इन मांगों को लेकर भी विधानसभा के अंदर सरकार पर सवाल उठा सकता है।
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भ्रष्टाचार का मुद्दा
विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुम्मन से जुड़े मामले को लेकर भी हंगामे के आसार हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने और संबंधित ठिकानों पर तलाशी के बाद विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है और इसको लेकर हंगामे के आसार हैं। इसके अलावा हाल ही में पारित बेअदबी विरोधी कानून में संभावित संशोधन को लेकर भी बवाल की आशंका है।