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बर्तन मांजे, जूते साफ किए, CM मान से पहले इन तीन CM को भी अकाल तख्त ने सुनाई सजा

पंजाब के सीएम भगवंत मान को श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सीएम भगवंत मान को ‘गुरु-द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ करार दिया है। इसके साथ ही सिख समुदाय से उनसे दूरी बनाए रखने की अपील भी की गई है।

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पंजाब के सीएम भगवंत मान, Photo Credit: AI

पंजाब की राजनीति में श्री अकाल तख्त साहिब के एक फैसले ने हलचल पैदा कर दी है। सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु-द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ करार दिया है। इसके साथ ही सिख समुदाय से उनसे दूरी बनाए रखने की अपील भी की गई है। इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया। इससे पहले भी पंजाब के तीन मुख्यमंत्रियों को अकाल तख्त सजा सुना चुका है। 

 

यह पूरा विवाद एक कथित वीडियो से जुड़ा है। यह वीडियो पहली बार अक्टूबर 2025 के दौरान चर्चा में आया था। जानकारी के मुताबिक यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। वीडियो में एक व्यक्ति दिखाई देता है जिसकी शक्ल मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलती-जुलती बताई गई। वीडियो में वह व्यक्ति हाथ में शराब का गिलास लिए सिख गुरुओं और धार्मिक तस्वीरों के सामने खड़ा दिखाई देता है और कथित तौर पर धार्मिक प्रतीकों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करता नजर आता है। वह वीडियो में गुरुओं पर शराब छिड़कता हुआ दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद कई सिख संगठनों और धार्मिक प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर धार्मिक मामला बताते हुए जांच की मांग की। मामला बाद में श्री अकाल तख्त तक पहुंच गया।

 

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भगवंत मान ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुरुआत से इस वीडियो को फर्जी बताया। उनका कहना था कि यह वीडियो एआई और डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया है और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से फैलाया गया है। सीएम मान ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर झूठा अभियान चलाया जा रहा है। हाल में उन्होंने फिर कहा कि उनके खिलाफ गलत प्रचार किया जा रहा है और वीडियो को लेकर लगाए जा रहे आरोप सही नहीं हैं।

अब क्यों हुआ एक्शन?

अकाल तख्त ने इस मामले को केवल आरोपों तक सीमित नहीं रखा। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के अनुसार, वीडियो की जांच के लिए केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त दो फोरेंसिक लैब की मदद ली गई। अकाल तख्त का दावा है कि दोनों जांच रिपोर्टों में वीडियो को एआई या एडिटेड नहीं माना गया। रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में छेड़छाड़ के संकेत नहीं मिले। इसके बाद पांच सिंह साहिबानों की बैठक बुलाई गई और चर्चा के बाद फैसला लिया गया।

 

अकाल तख्त ने कहा कि मुख्यमंत्री को वीडियो पर अपना पक्ष रखने और सबूत देने का समय दिया गया था लेकिन तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 15 जून को हुई बैठक के बाद अकाल तख्त ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' माना जाता है। इसके साथ सिख समुदाय से अपील की गई कि वे मुख्यमंत्री से सामाजिक और धार्मिक दूरी बनाए रखें। साथ ही पंजाब सरकार के सिख विधायकों और कैबिनेट से जुड़े कुछ लोगों को भी आगे उपस्थित होने के लिए कहा गया।

अब क्या बोली AAP?

आम आदमी पार्टी ने अकाल तख्त के फैसले पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि किसी वीडियो को वास्तविक मान भी लिया जाए तो उससे यह साबित नहीं होता कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान ही हैं। सीएम मान ने एक वीडियो जारी कर खुद कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कोई और है। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति से मेरी कद काठी भी नहीं मिलती। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें व्यक्ति की पहचान दो अलग-अलग मुद्दे हैं। 

इस्तीफे की मांग तेज

पंजाब की राजनीति में सिख धर्म और अकाल तख्त साहिब का बहुत ज्यादा महत्व है। अकाल तख्त के सीएम मान के खिलाफ दिए फैसले के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। विपक्ष लगातार उनसे इस्तीफे की मांग कर रहा है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी पर सिख विरोधी होने का आरोप भी लगा रहा है। 

 

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अब तक कितने सीएम से हुआ विवाद?

अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च संस्था है और इस संस्था का कई बार राजनीति के साथ टकराव भी देखा गया है। अकाल तख्त अब तक तीन मुख्यमंत्रियों को तलब कर चुका है। जिनमें भीमसन सच्चर (18 सितंबर 1956) को बर्तन और जूते साफ करने की सजा मिली थी। उन पर पंजाबी सूबा आंदोलन के दौरान दमन के आरोप लगे थे। 

 

सुरजीत सिंह बरनाला (5 सितंबर 1988) को पेश हुए और उन्हें गले में मैं पापी हूं कि पख्ती लटकाने की सजा मिली। उन पर ऑपरेशन ब्लैक थंडर में दरबार साहिब में पुलिस को जाने की इजाजत देने का आरोप था। इसके अलावा प्रकाश सिंह बादल को 4 अक्टूबर 1979 को पंथक एकता को नुकसान और अकाल तख्त के आदेशों की अनदेखी के आरोप में जूते और बर्तन साफ करने की सजा मिली थी। 

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