पंजाब में नशे का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है और अब सरकार भी एक्शन मोड में नजर आ रही है। राज्य में नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए सरकार ने पुलिस को विशेष अधिकार देने का फैसला किया है। गृह विभाग के इस निर्णय के तहत अब पुलिस कमिश्नर और रेंज इंचार्ज अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश जारी कर सकेंगे। यह आदेश जारी करने का अधिकार उन रेंज अधिकारियों को होगा जिनके पास इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) या उससे ऊपर का रैंक है। सरकार के इस कदम को नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
गृह विभाग के आदेश के अनुसार, संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने निर्धारित क्षेत्र में कानून के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन की शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करना और नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के प्रयासों को मजबूती देना है।
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जहां आईजी रैंक के अधिकारी नहीं वहां क्या?
सरकार के आदेश के अनुसार, प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश देने का अधिकार आईजी रैंक के अधिकारियों के पास होगा। हालांकि, जिन क्षेत्रों में आईजी रैंक का कोई अधिकारी तैनात नहीं है उनके लिए भी खास व्यवस्था की गई है। ऐसे क्षत्रों में छह वरिष्ठ सीनियर आईपीएस अधिकारियों को प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश जारी करने के अधिकार दिए गए हैं।
अधिकार क्षेत्र होगा तय
इन छह अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र का निर्धारण पंजाब के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी की ओर से किया जाएगा। संबंधित अधिकारी केवल उन्हीं क्षेत्रों में इन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे, जो डीजीपी की ओर से निर्धारित किए जाएंगे। इससे उन इलाकों में भी नशा विरोधी कार्रवाई के लिए प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी, जहां आईजी रैंक का अधिकारी तैनात नहीं है।
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बैकफुट पर सरकार और पुलिस
पंजाब में नशा लगातार बढ़ता जा रहा है और राज्यभर में इसके खिलाफ आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। अब पुलिस को नशे के खिलाफ अभियान में अतिरिक्त शक्तियां मिल गई हैं। ऐसे में नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत किया जा सकता है। विपक्षी दल और सामाजिक संगठन पुलिस पर ही मिलीभगत के आरोप लगा रहे हैं। राज्य सरकार और पुलिस लगातार फैल रहे नशे के मुद्दे पर बैकफुट पर नजर आ रही है।