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पंजाब में क्यों नहीं जीत पाती BJP? 5 मुद्दे जो बने हैं गले की फांस

पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब उन चंद राज्यों में से एक रह गया है जहां बीजेपी की सरकार नहीं है। बीजेपी पंजाब में विस्तार की कोशिश कर रही है लेकिन कुछ मुद्दे हैं जो बीजेपी की राह मुश्किल कर रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo Credit: PTI)

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भारतीय जनता पार्टी अब देश के ज्यादातर राज्यों में सत्ता में है। बीजेपी ने बंगाल में अपनी सरकार बनाने का सपना भी पूरा कर लिया है और जल्द ही बंगाल में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री शपथ लेगा। इसके साथ ही उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में बीजेपी या तो सरकार में है या फिर एक बड़ी पार्टी है लेकिन पंजाब में ऐसा नहीं है। पंजाब में बीजेपी अभी भी सिर्फ दो विधायकों वाली पार्टी है। पंजाब में बीजेपी सत्ता में जरूर रही है लेकिन शिरोमणि अकाली दल के छोटे भाई की भूमिका में और 2020 में वह गठबंधन भी टूट गया है। इसके बाद बीजेपी अब पंजाब में विस्तार की कोशिश कर रही है। 

 

किसान कानूनों के विरोध में बीजेपी और अकाली दल का दशकों पुराना गठबंधन टूट गया था। इस गठबंधन के टूटने के बाद से अब तक पंजाब में एक विधानसभा चुनाव और एक लोकसभा चुनाव हो चुका है। बीजेपी ने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा लेकिन कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। मौजूदा समय में पार्टी के कुल दो विधायक हैं और विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव भी पार्टी ने अकेले लड़े थे और एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। हालांकि, 18.56 प्रतिशत वोट हासिल कर तीसरी बड़ी पार्टी जरूर बनी थी। 

 

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पंजाब में क्यों नहीं बढ़ पा रही बीजेपी

पंजाब की राजनीति हमेशा से बाकी राज्यों से अलग रही है। यहां धर्म, किसान आंदोलन, क्षेत्रीय पहचान, सिख राजनीति और स्थानीय मुद्दे चुनावी माहौल तय करते हैं। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में मजबूत पकड़ रखने वाली बीजेपी पंजाब में अब तक वैसी सफलता हासिल नहीं कर पाई जैसी हिंदी पट्टी के राज्यों में उसे मिली है। पिछले कुछ सालों में बीजेपी ने पंजाब में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश की है लेकिन राज्य में कई ऐसे मुद्दे हैं जो पार्टी की पंजाब विरोधी छवि बनाते हैं।  

किसानी का मुद्दा

पंजाब में किसान राजनीति सबसे बड़ा फैक्टर मानी जाती है। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन ने बीजेपी की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया। पंजाब और हरियाणा के किसान कृषि कानूनों के खिलाफ कई दिनों तक दिल्ली बॉर्डर पर बैठे रहे लेकिन सरकार ने किसानों को नजरअंदाज किया। बीजेपी की छवि पहले से पंजाब में किसान विरोधी थी और इन कानूनों की वजह से पार्टी पर लोगों को और ज्यादा अविश्वास हो गया। भले ही बीजेपी ने बाद में इन कानूनों को वापिस ले लिया था लेकिन इन कानूनों की वजह से पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंच गया था। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में पार्टी को आज अभी भी विरोध का सामना करना पड़ता है।

चंडीगढ़ का मुद्दा

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार है और पंजाब में एक मजबूत धारणा है कि बीजेपी पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ को छिन लेगी। बीते साल चंडीगढ़ को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने के लिए एक विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा था। इस विधेयक के पास होने के बाद चंडीगढ़ में प्रशासक के रूप में लेफ्टिनेंट गवर्नर यानी एलजी की नियुक्ति करने का प्लान था। अब तक पंजाब के गवर्नर ही चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर काम करते थे। पंजाब के नेताओं ने इसका जमकर विरोध किया था और बाद में सरकार ने अपने फैसले पर यू टर्न भी ले लिया था। इस मु्द्दे के कारण भी बीजेपी बैकफुट पर है। 

हिंदू पार्टी की छवि

पंजाब की आबादी का एक बड़ा हिस्सा सिख है। भारतीय जनता पार्टी की छवि एक हिंदू पार्टी के रूप में बन गई है। पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव में पार्टी को इस छवि का फायदा भी मिला। उत्तर भारत के हिंदी पट्टी के ज्यादातर राज्यों में बीजेपी अपनी हिंदू छवि का फायदा उठाकर चुनावी सफलता का स्वाद चखती है लेकिन पंजाब में यही स्वाद कड़वा हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी की हिंदू छवि और शिरोमणि अकाली दल की सिखों की पंथक राजनीति से इस गठबंधन को पंजाब में कई बार सफलता मिली है। 

 

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पंजाब यूनिवर्सिटी का मुद्दा

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में स्थित एक ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी है जिसकी जड़े अविभाजित लाहौर में हैं। बंटवारे के बाद यह यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में स्थित है और केंद्र की बीजेपी सरकार कई बार इस यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने की कोशिश कर चुकी है। हालांकि, हर बार पंजाब के युवा और धार्मिक-सामाजिक ग्रुप सरकार के इस फैसले का विरोध करते हैं और सरकार को यू-टर्न लेना पड़ता है। पिछले साल ही इस यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव ना करवाने के फैसले पर बवाल हुआ था। पंजाब के कई नेता इसी यूनिवर्सिटी से पड़े हैं और इस यूनिवर्सिटी पर केंद्र की नजर बताते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए यह मुद्दा भी काफी मुश्किल भरा है। इसके अलावा पंजाब के पानी का मुद्दा भी बीजेपी के विरोध में काम करता है। लोगों में डर है की बीजेपी पंजाब के पानी को अन्य राज्यों को दे देगी। 

2027 का प्लान?

इन तमाम मु्द्दों के बावजूद भारतीय जनता पार्टी अपनी क्षमताओं के दम पर पंजाब की राजनीति में पैर जमाने की कोशिश कर रही है और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने का दावा कर रही है। दूसरी पार्टी के कई नेताओं को बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया है। इसके अलावा पार्टी ने कई सिख नेताओं को अपने पक्ष में किया है। पार्टी लगातार सिख धर्म की समर्थक दिखाने की कोशिश कर रही है। बंगाल जीत के बाद बीजेपी को पंजाब से बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं। 


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