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लंबे समय से बेअदबी कानून की मांग, AAP सरकार लाई तो विरोध क्यों करने लगा SGPC?

पंजाब सरकार ने हाल ही में विधानसभा के सत्र में बेअदबी से संबिधित एक बिल पेश किया था जो अब कानून बन चुका है। अब सिखों की सर्वोच्च संस्था SGPC ने इस बिल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Bhagwant Mann

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। Photo Credit: PTI

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पंजाब में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (अपवित्रता) के दोषियों को सजा का नया प्रावधान किया गया है। इस नए कानून के तहत अब आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये से 25 साख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। 17 अप्रैल को इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया है। लंबे समय से बेअदबी के मामलों में कड़े प्रावधानों की मांग उठ रही थी लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से लाए गए इस बिल के विरोध में अब सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने सवाल उठाए हैं। 

 

बीते रविवार पंजाब सरकार के इस कानून पर चर्चा करने के लिए SGPC ने एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सिख बुद्धिजीवी, विद्वान और SGPC के सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस मीटिंग में फैसला हुआ कि बिना SGPC या सिख समुदाय के प्रतिनिधियों से राय लिए बेअदबी के संबंध में कानून बनाया गया है और इस पर सफाई पेश करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को तलब किया है।

 

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SGPC से नहीं ली राय

इस कानून का विरोध SGPC इसलिए कर रही है क्योंकि धार्मिक मामले में बने इस कानून पर SGPC से कोई भी राय नहीं ली गई है। पंजाब सरकार की ओर से किसी भी प्रतिनिधि ने SGPC को संपर्क नहीं किया और ना ही उन्हें इस बिल के संबंध में विश्वास में लिया गया। जत्थेदार ने कहा कि पंथ बेअदबी के दोषियों को सख्त सजा देने के पक्ष में है लेकिन धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में बिना विचार-विमर्श कानून लागू करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं

जत्थेदार ने बताया कि मीटिंग में इस कानून के कुछ प्रावधानों पर चिंता जाहिर की गई है। इसमें धार्मिक जानकारी को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर डालने पर आपत्ति जताई गई और इसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा बताया गया। इसके साथ ही 2015 से लंबित बेअदबी के मामलों और न्याय में देरी पर भी चिंता जाहिर की गई है। उन्होंने कहा कि कई सरकारें बदलने के बावजूद मुख्य आरोपी अभी भी नहीं पकड़े गए हैं। 

सरकार को दी चेतावनी

इस मामले में जत्थेदार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पंथ की पंथ की सहमति के बिना गुरु साहिब से जुड़े मामलों में कोई भी कानून लागू नहीं होने दिया जाएगा। इस मीटिंग में बुढ्ढा दल, तरना दल, दमदमी टकसाल, निर्मले, उदासी और मिशनरी कॉलेजों समेत सिख समुदाय से जुड़े कई दल जुटे थे। इस बैठक में सिख समुदाय से जुड़े कई अन्य मामलों पर भी चर्चा हुई। 

 

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सीएम ने उठाए सवाल

पंजाब के सीएण भगवंत मान ने इस मीटिंग को लेकर SGPC पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार ने कानून बनाकर दिया है तो आपको उसका स्वागत करना चाहिए था। अब कहते हैं कि SGPC से पूछे बिना कानून बना दिया।' सीएम ने SGPC पर सवाल उठाते हुए कहा कि SGPC को एक परिवार ने दबा रखा है। उनका निशाना अकाली दल के नेता सुखबीर बादल पर था। उन्होंने कहा कि SGPC का प्रधान खुद को सुखबीर बादल का सिपाही बताता है। हालांकि, SGPC के विरोध के बाद अब देखना होगा कि इस बिल पर सरकार का क्या रुख रहता है। 

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