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भाभी से रेप की कोशिश! मां की गवाही के आधार पर कोर्ट ने दे दी सजा

राजस्थान में एक शख्स ने अपनी दो-दो भाभियों के साथ रेप करने की कोशिश की। कोर्ट ने सजा देते वक्त रामचरित मानस की चौपाई का उदाहरण दिया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: PTI

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राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में एक विशेष अदालत ने अपनी दो भाभियों से यौन उत्पीड़न करने के मामले में 52 साल की उम्र के व्यक्ति को 10 साल की सख्त कैद और 85,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पीओसीएसओ कोर्ट के जज डॉ. दुष्यंत दत्त ने 54 पेज के फैसले में आरोपी को दोषी ठहराया। 

 

अदालत ने धारा 376(2)(f) के तहत 50,000 रुपये जुर्माना, धारा 376 के साथ 511 के तहत 5 साल कैद और 25,000 रुपये जुर्माना, तथा धारा 354 के तहत 3 साल कैद और 10,000 रुपये जुर्माना लगाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

 

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मां ने दी गवाही

इस मामले में सबसे अहम भूमिका आरोपी की अपनी मां की रही। जज ने लिखा कि 'अपने बेटे के खिलाफ मां की गवाही पर विश्वास न करने का कोई कारण नहीं है।' मां ने अदालत में शपथ-पत्र देकर बताया कि उसका बेटा आदतन अपराधी है और उसके साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। 

 

दूसरी घटना के समय वह खुद मौजूद थी, जब आरोपी रात में दूसरी भाभी के घर घुसा तो उसके चीखने पर मां ने दौड़कर बेटे को भगाया। सरकारी वकील नरपत चौधरी ने कहा कि 'मां का बेटे के खिलाफ इतना मजबूत और सच्चा बयान बहुत दुर्लभ और विश्वसनीय होता है।'

क्या हुआ था?

केस 2021 का है और पिपर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था। पहली घटना 10 मार्च 2021 को हुई थी जब पहली भाभी खेत में शौच के लिए गई थीं, तब आरोपी ने उनका बलात्कार किया। दूसरी घटना 4 जुलाई 2021 की है जब आरोपी दूसरे भाभी के घर रात में घुसा, उन्हें छेड़ा और बलात्कार की कोशिश की। भाभी की चीख सुनकर उनकी शख्स की मां आ गईं और आरोपी भाग गया। बाद में दोनों भाभियों ने शिकायत दर्ज कराई।

दलीलों को खारिज किया

आरोपी पक्ष ने कहा कि यह जमीन के झगड़े के चलते फर्जी केस है लेकिन अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। जज ने लिखा, 'कोई भी भारतीय महिला अपनी इज्जत दांव पर लगाकर इतना गंभीर आरोप तब तक नहीं लगाती, जब तक वह सच न हो।'

रामचरितमानस का दिया हवाला

फैसले में जज डॉ. दुष्यंत दत्त ने प्राचीन स्मृतियों और रामचरितमानस के दोहे का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि 'छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्रवधू और कन्या’, ये चारों बेटी के समान हैं। इन पर बुरी नजर डालने वाले को सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।'

 

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यह मामला 2021 में शुरू हुआ। 2023 में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने इसे पीओसीएसओ कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। लंबी सुनवाई के बाद अब फैसला आया है।

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