मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक शातिर चोर को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों को किसी मिलिट्री ऑपरेशन जैसी मशक्कत करनी पड़ी। गिरफ्तारी से बचने के लिए एक चोर ने जो तरीका अपनाया उसे देखकर खुद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। यह शातिर अपराधी पुलिस को चकमा देने के लिए पास के एक काई से भरे तालाब में कूद गया। कमल की डंडी से सांस लेता रहा और करीब 5 घंटे तक पानी के भीतर ही दुबका रहा।
यह मामला 6 अप्रैल की सुबह सिहोरा रेलवे स्टेशन पर शुरू हुआ यह हाई-वोल्टेज ड्रामा दोपहर तक चला। आखिरकार रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने गोताखोरों की मदद से इस चोर को खोज निकाला और सलाखों के पीछे पहुंचाया।
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क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RPF की टीम ने ट्रेन नंबर 11753 से उतर रहे एक संदिग्ध व्यक्ति को रोकने की कोशिश की, जिस पर एक महिला का पर्स चुराने का आरोप था। पुलिस को देखते ही आरोपी स्टेशन के पास एक पुराने तालाब में कूद गया। काई की वजह से वह सतह पर दिखाई नहीं दे रहा था। घंटों बीत जाने के बाद जब सुरक्षा बलों को संदेह हुआ तो स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया। घंटों की तलाश के बाद पता चला कि आरोपी कमल की डंडी के जरिए ऑक्सीजन लेकर पानी के नीचे छिपा बैठा था।
पकड़े गए RPF की पहचान 32 वर्षीय हरविंदर सिंह के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। जांच में सामने आया कि हरविंदर कोई मामूली जेबकतरा नहीं, बल्कि एक खतरनाक अपराधी है। वह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सक्रिय रहा है। उसके खिलाफ भोपाल, इटारसी, उज्जैन और विशाखापत्तनम जैसे कई शहरों में चोरी और झपटमारी के दर्जनों मामले दर्ज हैं। वह अक्सर बिना टिकट ट्रेनों में सफर करता था और अकेले सफर करने वाली महिलाओं को अपना निशाना बनाता था।
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आरोपी के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज
RPF ने इस पूरी कार्रवाई को 'ऑपरेशन यात्री सुरक्षा' के तहत अंजाम दिया। अधिकारियों ने बताया कि हरविंदर बेहद शातिर है। वह अपनी पहचान छिपाने के लिए कभी कोई आईडी प्रूफ साथ नहीं रखता था और लगातार अपने सिम कार्ड बदलता रहता था। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड्स और न्यूज रिपोर्ट्स के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि की है। आरोपी के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उसे जबलपुर की विशेष रेलवे अदालत में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी से ट्रेनों में होने वाली चोरी की कई बड़ी गुत्थियां सुलझने की उम्मीद है।