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महिला सिपाहियों से छेड़छाड़ और वसूली का आरोप, जांच रिपोर्ट गायब

समस्तीपुर में शराब अधिकारी पर वसूली और बदसलूकी का आरोप है। 24 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई और जांच अधिकारी खुद भ्रष्टाचार में फंसा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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बिहार के समस्तीपुर जिले में शराब विभाग के बड़े अधिकारी पर बहुत गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर महिला पुलिसकर्मियों से छेड़छाड़ करने और दलालों के जरिए अवैध रूप से पैसे वसूलने का आरोप है। इस मामले की शिकायत बीजेपी के एक विधायक ने सीधे मुख्य सचिव से की है। सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे और 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी।  24 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है, जिससे विभाग के काम करने के तरीके पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब मोहद्दीननगर के बीजेपी विधायक राजेश कुमार सिंह ने जुलाई महीने में मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा। विधायक ने पत्र में बताया कि समस्तीपुर के शराब अधिकारी का व्यवहार बहुत खराब है। वह अपने दलालों के जरिए गैरकानूनी तरीके से पैसे कमा रहे हैं।

 

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि वह विभाग की महिला पुलिसकर्मियों के साथ गलत हरकत और छेड़छाड़ करते हैं। बड़े पद पर होने की वजह से डरी हुई महिला कर्मी उनके खिलाफ कुछ बोल नहीं पाती हैं। विधायक का यह भी कहना है कि जो थानेदार उन्हें पैसे नहीं पहुंचाते उन्हें दो-तीन महीने में ही हटा दिया जाता है। विधायक ने मांग की है कि इस मामले की जांच हो अधिकारी का ट्रांसफर किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

 

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24 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं हुई

विधायक की शिकायत के बाद मुख्य सचिव ने 7 जुलाई को विभाग के सचिव को जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद विभाग के अधिकारी ने पत्र लिखकर 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा था। हैरानी की बात यह है कि 24 दिन बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। जब जांच अधिकारी सुरेन्द्र प्रसाद से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे दो-चार दिन में रिपोर्ट दे देंगे। उन्होंने बताया कि वह एक बार समस्तीपुर जा चुके हैं और एक बार फिर जाकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। जांच में हो रही इस देरी से विभाग के लोग भी नाराज हैं।

 

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खुद भ्रष्टाचार में फंसे हैं जांच अधिकारी

प्रोहिबिशन डिपार्टमेंट ने जिस इकॉनॉमिक ऑफेन्स यूनिट (EIB) के उपायुक्त सुरेन्द्र प्रसाद को जांच की जिम्मेदारी दी है वह खुद भ्रष्टाचार के पुराने मामले में फंसे हैं। निगरानी विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, सुरेन्द्र प्रसाद जब समस्तीपुर में इंस्पेक्टर थे तब 20 अप्रैल 2007 को उन्हें रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था और उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।

 


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