logo

मूड

ट्रेंडिंग:

राम मंदिर चढ़ावा केस: सुप्रीम कोर्ट ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़े

राम मंदिर चढ़ावा केस में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी में सीए व फोरेंसिक ऑडिटर शामिल कर पेशेवर तरीके से जांच करने के आदेश दिए है। दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने का फरमान सुनाया है।

Ayodhya Ram Mandir PTI

अयोध्या राम मंदिर। Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

अयोध्या राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान जांच को लेकर बड़ा और सख्त रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरी पारदर्शिता और पेशेवर तरीके से होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया है।

 

अदालत ने कहा कि चढ़ावे से जुड़े वित्तीय लेनदेन की गहन जांच जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं के दान की हर राशि का सही हिसाब सामने आ सके। सुप्रीम कोर्ट ने विस्तारित एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश देते हुए साफ किया कि फिलहाल उसकी प्राथमिकता निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना है।

 

जांच में अब वित्तीय विशेषज्ञों की भी होगी भूमिका

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए केवल पुलिस जांच पर्याप्त नहीं है। इसलिए एसआईटी में चार्टर्ड अकाउंटेंट और फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया जाए, ताकि चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और धन के प्रवाह की वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल हो सके।

 

यह भी पढ़ें: यूपी और पंजाब चुनाव से पहले BJP का रविदास कार्ड, 'मिट्टी' कराएगी राजतिलक

'पहले निष्पक्ष जांच, बाकी फैसले बाद में'

सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि इस समय उसका पूरा ध्यान निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण जांच पर है। एसआईटी बिना किसी दबाव के अपना काम करे और दो सप्ताह के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करे। अन्य कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर फैसला रिपोर्ट देखने के बाद लिया जाएगा।

दान की राशि पर उठे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत के सामने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दी गई राशि पूरी तरह ट्रस्ट तक पहुंची या नहीं, इसकी पारदर्शी जांच आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रस्ट को प्राप्त दान का विवरण सार्वजनिक किया जाए ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे। अदालत ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए जांच में वित्तीय विशेषज्ञों को शामिल करने का निर्देश दिया।

 

यह भी पढ़ें: कई साल पहले हो गई मौत लेकिन अभी भी हैं कर्जदार, संपत्ति पाकर बेटे हो गए जमींदार

पहले भी अदालत दे चुकी है सख्त संदेश

सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और इसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश से बचना चाहिए।अब विस्तारित एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश तय करेगी। ऐसे में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की अगली सुनवाई और एसआईटी की रिपोर्ट पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।


और पढ़ें