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कर्नाटक के कलबुर्गी में सुरक्षा कड़ी, आज दरगाह में पूजा करेंगे हिंदू

शिवरात्रि पर मशक दरगाह में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अदालत के आदेश पर हिंदू समाज को सीमित पूजा अर्चना की अनुमति मिली है। यह दरगाह कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद कस्बे में स्थित है।

Mashk Dargah News

एसपी अडुरु श्रीनिवासुलु। ( Photo Credit: ANI)

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने कलबुर्गी जिले के आलंद कस्बे में स्थित मशक दरगाह में महाशिवरात्रि पूजा करने की अनुमति दी है। यहां दरगाह के भीतर राघव चैतन्य शिवलिंग स्थापित है। 15 फरवरी को हाई कोर्ट ने सिर्फ एक याचिकाकर्ता को पूजा करने की मंजूरी दी है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने दरगाह स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। तीन जिलों की पुलिस तैनात की गई। सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। इलाके में निषेधाज्ञा लागू की गई है।

 

एसपी अडुरु श्रीनिवासुलु ने कहा, 'अलंद स्थित लाडले मशक दरगाह में महाशिवरात्रि पर कलबुर्गी, बीदर और यादगीर जिले के 1000 जवान और अधिकारियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा रिजर्व फोर्स, एएसआरपी, एडीआर के अलावा लगभग 40 सीसीटीवी और और चार ड्रोन को तैनात किया गया है।'

 

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उन्होंने आगे कहा, 'आज अलंद शहर में धारा 144 या 163 BNS लागू है। हमने दरगाह इलाकों में कड़ी पाबंदी लगाई है। दूसरे गैर-संवेदनशील इलाकों में आज कुछ जरूरी दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई है। गैर-जरूरी दुकानों बंद रखा गया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल हमने पब्लिक गाड़ियों की आवाजाही को आसानी से चलने दिया है। हालांकि गाड़ियों की जांच की जा रही है, ताकि कोई भी शरारती तत्व अलंद शहर में न घुसे। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।'

 

 

 

 

गुरुशांत तेंगली और सिद्धारमैया हीरेमठ ने हाई कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कीं। आरटीआई कार्यकर्ता सिद्धारमैया हीरेमठ ने दावा किया कि दरगाह स्थल पर शिवलिंग की स्थापना एक सदी से भी पहले की गई थी। हाई कोर्ट ने दो साल पहले भी पूजा करने की अनुमित दी थी। याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सिद्धारमैया हीरसेठ को पूजा करने की अनुमति दी। लाडले मशक दरगाह समिति ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी।

 

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हालांकि शीर्ष अदालत ने आदेश को रदद् करने से मना कर दिया। अदालत ने 13 अन्य लोगों को भी पूजा करने की मंजूरी दी है। हालांकि कडागांची विरक्त मठ के पीठाधिपति श्री वीरभद्र शिवचार्य को इजाजत नहीं मिली है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने याचिका पर हस्ताक्ष नहीं किया था।

 

आदेश के मुताबिक सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक मुस्लिम समुदाय के सदस्य दरगाह में नमाज अदा करेंगे। वहीं दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक हिंदू पूजा करेंगे। आलंद के मशक दरगाह में 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य की समाधि है। उनकी ही समाधि पर शिवलिंग स्थापित है। कर्नाटक में इस शिवलिंग की पहचान राघव चैतन्य के तौर पर होती है। वहीं दरगाह का नाम सूफी संत लाडले मशक के नाम पर रखा गया है।


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