दिल्ली के शालीमार बाग इलाके के हैदरपुर क्षेत्र में अवैध निर्माण हटाने के लिए सरकार ने ध्वस्तीकरण अभियान की शुरुआत की है। रविवार को कई घरों पर संकट के बाद मंडरा रहे हैं, कई घर जमींदोज हो चुके हैं। शालीमार बाग, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की विधासनभा है, उन्हीं की विधानसभा में इस फैसले का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अवैध घरों के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद प्रशासन ने सड़कों के चौड़ीकरण के लिए यह कार्रवाई शुरू की है। प्रशासनिक अधिकारी एसएस परिवार ने कहा है कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की जा रही है। जब तक इलाके से सारे अवैध ढांचे हटा नहीं दिए जाते, कार्रवाई जारी रहेगी।
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क्यों गिराए जा रहे शालीमार बाग में मकान?
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के मास्टर प्लान में सड़क के लिए चिह्नित सरकारी भूमि है। यह रोड नंबर 320 का हिस्सा है। यहां की 30 मीटर जमीन, सड़क के अधिकार के तहत आती है। यह सड़क शालीमार बाग रेलवे अंडरब्रिज को आउटर रिंग रोड से जोड़ती है और आसपास के इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देती है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध कब्जे की वजह से सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई थी। इससे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य इमरजेंसी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी।
कब से है इन जमीनों पर कब्जा?
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 1959 और 1961 में शुरू हुई थी। 1966 में अधिग्रहण की घोषणा हुई और 1980 में कब्जा ले लिया गया। 1981 तक सारी मुआवजा राशि जमा कर दी गई थी। इस साल जनवरी में हुई संयुक्त सर्वे में 30 मीटर 'राइट ऑफ वे' में 143 स्थायी अवैध ढांचे पाए गए। प्रशासन ने कम से कम लोगों को प्रभावित करने का सिद्धांत अपनाया है। पूरी 30 मीटर की जगह की बजाय केवल जरूरी 10.5 मीटर हिस्से को साफ किया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा फैसला
जनवरी में प्रभावित लोगों को नोटिस जारी कर आपत्तियां मांगी गई थीं। आपत्तियों पर विचार करने के बाद मार्च में आदेश जारी किया गया। कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन 6 अप्रैल को उसे खारिज कर दिया गया। रिव्यू पिटिशन भी 18 मई को खारिज हुई। आखिरकार 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी।
प्रभावित परिवारों को मिलेगा क्या?
दिल्ली सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए मदद का पैकेज घोषित किया है। इसमें पात्र परिवारों को 3 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जाएगी। जिनके पास दिल्ली में दूसरा घर नहीं है, उन्हें सवदा घेवरा में 11 महीने तक अस्थायी आवास भी उपलब्ध कराया जाएगा। स्थानीय लोगों ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। लोगों के रोते-बिलखते वीडियो भी वायरल हो रहे हैं।