संजय सिंह, पटना। बिहार और झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह के कारण तीन लोगों की हत्या हो चुकी है। आज पुलिस की तत्परता से एक महिला की जान बच गई। शेखपुरा स्थित आदर्श नगर थाना क्षेत्र के कमासी गांव में गुरुवार को बच्चा चोरी की अफवाह के बाद हालात अचानक बेकाबू हो गए। एक महिला को बच्चा चोर समझकर ग्रामीणों ने पकड़ लिया और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
आक्रोशित भीड़ महिला के साथ मारपीट पर उतर आई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला को भीड़ से सुरक्षित निकाल लिया और संभावित मॉब लिंचिंग की घटना को समय रहते टाल दिया।
मासूम की शोर से उग्र हुई भीड़
घटना के संबंध में बताया गया कि कमासी गांव निवासी लालो महतो की करीब डेढ़ वर्षीय नतिनी घर के सामने गली में खेल रही थी। इसी दौरान लगभग 20 वर्षीय एक महिला बच्ची को गोद में लेकर वहां से निकलती हुई दिखी। बच्ची के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनकर परिजनों का ध्यान गया तो बच्ची की मां ने महिला को बच्ची के साथ जाते देख शोर मचा दिया। शोर सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। खुद को घिरता देख महिला बच्ची को वहीं छोड़कर खेत की ओर भागने लगी, लेकिन ग्रामीणों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया।
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महिला के पकड़े जाने के बाद गांव में अफवाह तेजी से फैल गई कि वह बच्चा चोर है। इसके बाद भीड़ उग्र हो गई और महिला के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। स्थिति लगातार बिगड़ती देख किसी ने तत्काल 112 पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और महिला को अपने कब्जे में लेकर भीड़ के बीच से बाहर निकाला। पुलिस की सतर्कता और त्वरित हस्तक्षेप से एक बड़ी अप्रिय घटना होने से बच गई।
पुलिस की तत्परता से बची महिला की जान
आदर्श नगर थाना क्षेत्र के कमासी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला को लेकर फैल रही अफवाहों ने लोगों को उकसा दिया। भ्रामक जानकारी के कारण देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और हालात तनावपूर्ण हो गए। भीड़ का आक्रोश बढ़ता देख किसी भी अनहोनी की आशंका गहराने लगी। इसी बीच सूचना मिलते ही पुलिस दल त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने संयम और सूझबूझ से काम लेते हुए पहले महिला को सुरक्षित घेरे में लिया और फिर भीड़ को शांत करने का प्रयास किया। पुलिस ने लोगों को समझा बुझाकर और सख्ती के साथ हालात पर काबू पाया गया। महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर प्राथमिक सहायता भी दिलाई गई। समय पर पुलिस के हस्तक्षेप से न केवल महिला की जान बच सकी, बल्कि क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था भी संभल गई। हालांकि बाद में पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है।
संदेह होने पुलिस को दें सूचना, भीड़तंत्र से बचें
इस घटना को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से सतर्क और जिम्मेदार रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, व्यक्ति या घटना की जानकारी मिलने पर लोग स्वयं निर्णय लेने या भीड़ इकट्ठा करने के बजाय सीधे पुलिस को सूचना दें। अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई कई बार निर्दोष लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भीड़तंत्र कानून के खिलाफ है और इससे स्थिति और अधिक बिगड़ती है। समय पर दी गई सही सूचना से पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित कर सकती है। प्रशासन ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों पर भरोसा न करने और शांति बनाए रखने की भी अपील की है। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि हर सूचना को गंभीरता से लिया जाएगा और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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क्या बोले थानाध्यक्ष?
इस संबंध में आदर्श नगर थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पकड़ी गई महिला को थाने लाकर पूछताछ की गई। वह मानसिक रूप से विक्षिप्त पाई गई है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी उक्त महिला को शहर के गिरिहिंडा इलाके में भटकते हुए पाया गया था, जहां पहचान होने पर उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। प्रारंभिक जांच में महिला के खिलाफ बच्चा चोरी से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि महिला किस परिस्थिति में गांव तक पहुंची और बच्चा चोरी की अफवाह कैसे फैली। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें और कानून को अपने हाथ में न लें, क्योंकि अफवाहों के आधार पर की गई कार्रवाई किसी निर्दोष की जान के लिए खतरा बन सकती है।