कर्नाटक की राजनीतिक में एक नए तरह की जुबानी जंग देखने को मिली है। इस बार एक तरफ कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हैं तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी हैं। रविवार को दोनों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों नेताओं ने जाति, राजनीति और परिवारवाद को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बीते दिनों केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया पर आरोप लगाया कि उनका राजनीतिक करियर जाति की राजनीति की वजह से चल रहा है। इस आरोप को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खारिज कर दिया। साथ ही, उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, 'कुमारस्वामी और उनके पूजनीय पिता एच. डी. देवेगौड़ा जातिवादी नहीं हैं बल्कि वे अपनी ही जाति के खिलाफ हैं। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि वह परिवार-केंद्रित हैं। उनके लिए जाति केवल एक वोट बैंक है।' इन बयानों से साफ होता है कि दोनों नेताओं की जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई है।
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केंद्रीय मंत्री पर लगा परिवारवाद का आरोप
जहां एक तरफ केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया को जातिवादी नेता कहा, वहीं दूसरी तरफ सिद्धारमैया ने पलटवार करते हुए कुमारस्वामी के परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में जनता दल (सेक्युलर) पार्टी में केवल देवेगौड़ा परिवार का ही व्यक्ति नेता बन पाएगा क्योंकि उनकी पार्टी में परिवारवाद ने जड़ जमा ली है। उन्होंने कहा, 'जद (एस) के अतीत, वर्तमान और भविष्य के नेता गौड़ा परिवार के ही सदस्य होंगे।'
कुमारस्वामी का पलटवार
कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया की ओर से अपने पिता पर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने सिद्धारमैया पर आरोप लगाया कि वह समाज सुधारक नहीं बल्कि समाज विनाशक हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एच. डी. देवेगौड़ा पर सवाल उठाने से पहले सोचना चाहिए। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि सिद्धारमैया का राजनीतिक करियर देवेगौड़ा की वजह से ही बना है।
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कुमारस्वामी ने कहा, 'आप सामाजिक न्याय के समर्थक नहीं बल्कि उसके विनाशक हैं। यह चौंकाने वाली बात है कि आप देवेगौड़ा पर उंगली उठा रहे हैं, जिन्होंने आपको राजनीतिक ताकत प्रदान की।' कुमारस्वामी ने अपने ऊपर लगे परिवारवाद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, 'आपके सामाजिक न्याय में कोई नैतिक आधार नहीं है। अगर होता तो मल्लिकार्जुन खरगे आपसे पहले मुख्यमंत्री बन चुके होते।'