बिहार के सीवान जिला शिक्षा कार्यालय में सांसद के कथित फर्जी हस्ताक्षर और सरकारी लेटर पैड के दुरुपयोग के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सारण प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE) ने जिला शिक्षा कार्यालय के तत्कालीन निम्न वर्गीय क्लर्क रंजन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले में नियमित विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। जांच 45 दिनों के अंदर पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
RDDE संजय कुमार द्वारा जारी सस्पेंशन ऑर्डर में कहा गया है कि सिवान के जिला शिक्षा अधिकारी ने रंजन कुमार के खिलाफ आरोप तय किए थे और सोख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। जांच में क्लर्क के कामकाज का तरीका संदिग्ध पाया गया। इसके अलावा, बिना मंजूरी के पेमेंट करने के आरोपों को भी शुरुआती तौर पर गंभीर माना गया। इन्हीं आधारों पर RDDE ने सस्पेंशन ऑर्डर जारी किया।
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सांसद ने की थी लिखित शिकायत
इस पूरे मामले की शुरुआत स्थानीय सांसद विजयलक्ष्मी देवी की शिकायत से हुई। सांसद ने विभाग को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि रंजन कुमार ने उनके नाम के फर्जी हस्ताक्षर किए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि क्लर्क ने सांसद के लेटर पैड का दुरुपयोग किया और उसके आधार पर अवैध भुगतान कराया। सांसद ने विभाग से संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की थी।
सांसद की शिकायत के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। आरोप सामने आने के बाद विभाग ने रंजन कुमार से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। उन्हें निर्धारित समय सीमा के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा गया था। आरोपित क्लर्क ने समय सीमा के भीतर कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। विभाग ने इसे आरोपों को स्वीकार करने जैसा माना और कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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सोनपुर डायट बना मुख्यालय
निलंबन के बाद रंजन कुमार का मुख्यालय अब सारण जिले के सोनपुर स्थित डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) बनाया गया है। सस्पेंशन के दौरान उन्हें बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली के तहत जीवनयापन भत्ता मिलेगा। यह भत्ता उनकी उपस्थिति और अनुपस्थिति की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित अधिकारी जारी करेंगे। इस पूरे मामले की विभागीय जांच के लिए दो अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। गोपालगंज के जिला शिक्षा पदाधिकारी को जांच का संचालन अधिकारी बनाया गया है, जबकि सीवान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
विभाग ने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आरोप-पत्र जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दें। वहीं रंजन कुमार को आरोप-पत्र मिलने के 15 दिनों के अंदर अपना लिखित जवाब और अपने पक्ष में मौजूद सबूत पेश करने होंगे। अब सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर रंजन कुमार के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।