बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्रों को मिलने वाले शिक्षा ऋण में कटौती की खबरों को राज्य सरकार ने गलत बताया है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने स्पष्ट किया है कि योजना के दायरे को और बढ़ाया गया है।अब विद्यार्थियों को 2 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से मिलेगा। वहीं 2 लाख से 4 लाख तक की राशि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले निगम के माध्यम से ही 4 लाख तक का लोन दिया जाता था। सरकार का कहना है कि बैंकों को जोड़ने से प्रक्रिया तेज होगी और अधिक छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।
सरकार ने योजना को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना और पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल से भी जोड़ दिया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। अब छात्र पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के माध्यम से 10 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण भी ले सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार इससे पहले छात्रों के पास सिर्फ निगम का एक ही विकल्प था। अब उनके पास तीन विकल्प हो गए हैं। पहला निगम से 2 लाख तक, दूसरा बैंक से 2 से 4 लाख तक और तीसरा पीएम विद्यालक्ष्मी से 10 लाख तक। विभाग का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता के विकल्प पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं और छात्रों को लोन मिलने में सहूलियत होगी।
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सरकार ने दी सफाई
सरकार ने आंकड़ों के जरिए भी सफाई दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लिए 886 करोड़ रुपए के व्यय की स्वीकृति दी गई थी। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 950 करोड़ कर दिया गया है। यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल योजना के लिए 64 करोड़ रुपए अधिक का प्रावधान किया गया है। सचिव ने कहा कि आंकड़े साफ बताते हैं कि योजना के तहत वित्तीय सहायता घटी नहीं है, बल्कि बढ़ी है। सरकार का मकसद किसी भी योग्य छात्र को पैसे के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित न रहने देना है। इसलिए बजट भी बढ़ाया गया है और बैंकों को भी सिस्टम से जोड़ा गया है।
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कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन
उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को आसान, व्यापक और संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। बैंकों के जुड़ने से लोन की स्वीकृति और वितरण में पारदर्शिता आएगी। साथ ही पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल से जुड़ने के बाद छात्र घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। विभाग का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। योजना पहले की तरह जारी है और इसका दायरा बढ़ाया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक छात्र इस योजना का लाभ लेकर उच्च शिक्षा पूरी करें और आत्मनिर्भर बनें।