हिमाचल के आर्थिक हितों पर CM सुक्खू का बड़ा बयान, बोले- हक नहीं छोड़ेंगे
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने किशाऊ प्रोजेक्ट से 3000 करोड़ रुपए बचाने का बड़ा दावा किया है। वहीं, बीबीएमबी बकाया पर सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद जताई है। CM ne डीए की शेष किस्तें उचित समय पर देने का आश्वासन दिया है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, Photo Credit-DPR Shimla
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल के अधिकारों और आर्थिक हितों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश अपने हक से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। सिरमौर के सराहां में वामन द्वादशी मेले के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने किशाऊ परियोजना, बीबीएमबी की लंबित राशि, वाइल्ड फ्लावर हॉल, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते, पुरानी पेंशन योजना और आपदा राहत समेत कई मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर हुए हालिया समझौते से हिमाचल को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। उनके अनुसार, पूर्व की व्यवस्था में परियोजना की लागत का भार हिमाचल पर पड़ रहा था, जबकि वर्तमान सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों को पानी की जरूरत है, परियोजना का खर्च भी उन्हीं राज्यों को वहन करना चाहिए। सुक्खू ने दावा किया कि नए समझौते से हिमाचल के खजाने के करीब 3,000 करोड़ रुपये बचेंगे। साथ ही परियोजना शुरू होने के बाद प्रदेश को हर साल 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की उम्मीद है।
बीबीएमबी के बकाये पर सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी की लंबित बकाया राशि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और उम्मीद है कि बकाया राशि के भुगतान को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिमाचल के हित में आएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों से जुड़े मामलों को मजबूती से उठा रही है और वित्तीय संसाधनों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल ने 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में यह कानूनी लड़ाई जीती है। उनके अनुसार, फैसले के बाद राज्य के खजाने में 401 करोड़ रुपये जमा हुए हैं, जबकि होटल से सरकार को करीब दो करोड़ रुपये प्रतिमाह राजस्व प्राप्त हो रहा है। सुक्खू ने केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसे बंद किए जाने से हिमाचल को करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय दबाव के बावजूद सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर वेतन-पेंशन देने का प्रयास कर रही है तथा लंबित देनदारियों का भुगतान भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लास-3 कर्मचारियों के पेंशन संबंधी पूरे बकाये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि महंगाई भत्ते की शेष किस्तों का भुगतान भी उचित समय पर किया जाएगा।
ओपीएस पर सुक्खू का BJP पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में पुरानी पेंशन योजना बहाल की थी। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में और अधिक कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो कर्मचारियों के लिए ओपीएस बंद कर देगी। सीएम ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मासिक आय को 25 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने किसानों और पशुपालकों के लिए दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि तथा प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए एमएसपी का प्रावधान किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अदरक को भी समर्थन मूल्य व्यवस्था के दायरे में लाया गया है।
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सरकारी सीबीएसई स्कूलों का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए सरकार सीबीएसई स्कूल खोल रही है। उन्होंने कहा कि निजी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षा पर करीब एक लाख रुपये तक खर्च होता है, जबकि सरकारी स्कूलों में इसी तरह की सुविधाएं कम लागत में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पिछली बीजेपी सरकार के कार्यकाल में भूमि आवंटन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र में 5,000 बीघा से अधिक जमीन कम रियायती दरों पर पसंदीदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सार्वजनिक धन और संसाधनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों का जिक्र करते हुए सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए सहायता राशि को 1.5 लाख से बढ़ाकर 8.5 लाख रुपये किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हिमाचल के लिए 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी, लेकिन उनके अनुसार अभी तक इस घोषणा के तहत राज्य को राशि प्राप्त नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि बचाई गई है। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों का इस्तेमाल अनाथ बच्चों, विधवाओं और समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के चेक वितरित किए और स्मारिका का विमोचन किया।
हर्षवर्धन चौहान बोले- सरकार ने आपदा के साथ राजनीतिक संकट भी झेला
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने क्षेत्र के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात का उल्लेख किया। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार को प्राकृतिक आपदा के साथ राजनीतिक संकट का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया।
पूर्व मंत्री गंगूराम मुसाफिर ने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आने के समय करीब 75,000 करोड़ रुपये के कर्ज और कर्मचारियों से संबंधित लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियों की स्थिति विरासत में मिली थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने चुनावी वादे पूरे किए हैं और ओपीएस बहाल की है।
कांग्रेस नेता दयाल प्यारी ने पच्छाद क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि हाल में हुई टीजीटी भर्ती में पच्छाद को सबसे अधिक शिक्षक मिले हैं। कार्यक्रम में विधायक विनोद सुल्तानपुरी, अजय सोलंकी और सुदर्शन बबलू, सिरमौर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आनंद परमार, उपायुक्त प्रियंका वर्मा, पुलिस अधीक्षक निशांत नेगी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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