संजय सिंह, पटना। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद से तेज प्रताप यादव के बयान की बिहार की सियासत में खूब चर्चा है। एक इंटरव्यू में तेज प्रताप ने नीतीश सरकार के कामकाज की खूब तारीफ की। वहीं अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव पर हमला करके नई सियासी बहस छेड़ दी।
तेज प्रताप यादव का कहना है कि नीतीश कुमार उनके पिता लालू प्रसाद यादव के पुराने साथी हैं और वह 'चाचा' के समान हैं। नीतीश कुमार राजनीति में हमसे काफी वरिष्ठ हैं, हम तो अभी उनके सामने बच्चे हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत रिश्तों को अहम बताया, बल्कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सम्मान बनाए रखने की भी बात दोहराई।
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सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब तेज प्रताप ने नीतीश कुमार के शासन को 10 में से 9 अंक दे दिए। आमतौर पर विरोधी खेमे से इस तरह की खुली सराहना कम ही देखने को मिलती है, ऐसे में उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे कई लोग बिहार की बदलती सियासत के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन राजनीति का सामान्य हिस्सा
जब उनसे उनकी मां राबड़ी देवी के संदर्भ में सवाल किया गया, जिन्हें हटाकर ही नीतीश कुमार सत्ता में आए थे तो तेज प्रताप ने बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन राजनीति का सामान्य हिस्सा है और इसे निजी रिश्तों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके इस नरम रुख ने यह संकेत दिया कि वे व्यक्तिगत संबंधों को राजनीतिक टकराव से अलग रखने के पक्षधर हैं।
सम्राट से बेहतर काम करने की उम्मीद
मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बधाई दी और उनसे बड़ी उम्मीदें भी जताईं। उन्होंने कहा कि नई सरकार को नीतीश कुमार के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए। खासकर युवाओं के लिए रोजगार सृजन को उन्होंने सबसे अहम मुद्दा बताया और कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे। हालांकि, बातचीत का सबसे तीखा हिस्सा तब सामने आया जब तेज प्रताप ने अपने ही छोटे भाई तेजस्वी यादव पर निशाना साधा।
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'भाई तेजस्वी यादव को घेरा'
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पार्टी से अलग होने के बाद ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का पतन शुरू हुआ। तेज प्रताप ने कहा कि तेजस्वी अब जनता से कट चुके हैं और जमीनी मुद्दों को समझने में असफल हो रहे हैं। इस बयान ने राजद के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। तेज प्रताप यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि राजद अब कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, पार्टी के पास सीमित विधायक रह गए हैं और उनमें भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो भविष्य में पार्टी को और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बिहार की राजनीति में यह बयान ऐसे समय आया है, जब सत्ता परिवर्तन के बाद नई राजनीतिक समीकरण तेजी से बन रहे हैं। तेज प्रताप यादव के एक साथ दोहरे रुख एक ओर नीतीश कुमार की तारीफ और दूसरी ओर तेजस्वी यादव पर हमला ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।