बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने पुलिस और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने वैशाली के यूट्यूबर कुंदन कुमार की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई को लेकर बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में पुलिस का अत्याचार बढ़ रहा है और लोगों को फर्जी केस में फंसाने, धमकाने और निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का काम किया जा रहा है।
तेजस्वी ने कहा, 'बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह खराब हो गई है। पुलिस जनता की रक्षक होने के बजाय भक्षक बन गई है।' उन्होंने कुंदन कुमार के मामले का जिक्र करते हुए कहा, 'एक छोटे यूट्यूबर को पुलिस ने परेशान किया और फर्जी केस में फंसाया। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वह सच दिखा रहा था।'
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पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
तेजस्वी ने कहा, 'बिहार में पुलिस फर्जी केस में लोगों को फंसाने और धमकाने का काम कर रही है। थानों में बिना पैसे के एफआईआर तक दर्ज नहीं हो रही है। गरीब, दलित और पिछड़े समाज के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।' उन्होंने एनकाउंटर के नाम पर भी पुलिस पर सवाल उठाए।
तेजस्वी ने कहा कि इस मामले को लेकर उनकी स्थानीय एसपी से बात हुई है और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वह वैशाली जाएंगे। तेजस्वी ने कहा, 'पुलिस का रवैया नहीं बदला तो आरजेडी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी। यूट्यूबर हो या आम आदमी, सभी को न्याय मिलना चाहिए।'
तेजस्वी ने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा, 'उन्होंने पुलिस को खुली छूट दे रखी है। पुलिस मनमानी कर रही है और अधिकारी सरकार के इशारे पर विपक्ष के लोगों को निशाना बना रहे हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कई पत्रकारों और यूट्यूबरों को फर्जी केस में जेल भेजा गया है। यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए ठीक नहीं है।
आरक्षण पर एनडीए नेताओं से सवाल
तेजस्वी ने आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए के घटक दलों के नेताओं को भी घेरा। उन्होंने कहा, 'एनडीए के कई नेता आरक्षण का लाभ तो लेते हैं लेकिन आरक्षण का दायरा बढ़ाने के मुद्दे पर चुप हैं।'
तेजस्वी ने बिहार में जातीय जनगणना के आधार पर बढ़ाए गए 65 प्रतिशत आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार ने जातीय जनगणना कराई और आरक्षण का दायरा 65 प्रतिशत तक बढ़ाया लेकिन केंद्र सरकार ने इसे नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया। इसी वजह से मामला कोर्ट में अटक गया।'
उन्होंने चिराग पासवान,
नीतीश कुमार
और जीतन राम मांझी समेत एनडीए के दूसरे नेताओं से सवाल किया कि जब बिहार में आरक्षण का दायरा बढ़ाया गया है तो इसे नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाया जा रहा है। तेजस्वी ने कहा, 'चिराग पासवान खुद को दलितों का नेता कहते हैं, जीतन राम मांझी दलितों की बात करते हैं और नीतीश कुमार पिछड़ों-अतिपिछड़ों की बात करते हैं लेकिन जब आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात आती है तो सभी चुप हो जाते हैं।' उन्होंने एनडीए नेताओं पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
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आबादी के हिसाब से आरक्षण की मांग
तेजस्वी ने कहा, 'जातीय जनगणना तभी सार्थक होगी, जब लोगों को उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण का लाभ मिले और आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए। जातीय जनगणना का मतलब ही है कि जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी।' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जातीय जनगणना कराने से बच रही है। तेजस्वी ने कहा, 'बिहार में हुई जातीय जनगणना देश के लिए एक मॉडल है।' उन्होंने भाजपा पर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा, 'पार्टी नहीं चाहती कि पिछड़ों और दलितों को उनका हक मिले।'
तेजस्वी ने कहा, 'आजेडी इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है और सड़क से सदन तक लड़ाई जारी रखेगी। आने वाले चुनाव में आरक्षण बड़ा मुद्दा होगा। जनता सब देख रही है कि कौन आरक्षण के पक्ष में है और कौन इसके विरोध में।'