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बिहार में चोरों के निशाने पर मंदिर, कहीं धार्मिक भावना भड़काने की साजिश तो नहीं?

बिहार के मंदिरों में लगातार चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने पुलिस प्रशासन पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। वहीं, बढ़ती चोरी की घटनाओं से लोगों में आक्रोश है।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: SORA

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संजय सिंह, पटना, बिहार के मंदिरों में लगातार चोरी की घटनाएं बढ़ रही है। चोरी की घटना में अंतरराज्यीय गिरोह भी सक्रिय है। नई सरकार के गठन के बाद अब तक तीन महत्वपूर्ण मंदिरों में चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी है। गोपालगंज के थाबे मंदिर में चोरी के मामले को सुलझा पाने में पुलिस को कुछ हद तक सफलता मिली है लेकिन छपरा और कटिहार के मंदिरों में चोरी के मामले में पुलिस का हाथ खाली है।

 

बिहार के मंदिरों में चोरी की लगातार बढ़ रही घटनाओं से लोगों में आक्रोश है। लोग पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं, पुलिस के सीनियर अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे धार्मिक भावना को भड़काने की साजिश भी हो सकती है। पुलिस मुख्यालय ने मंदिरों की सुरक्षा के लिए जिले के पुलिस पदाधिकारियों को अलर्ट भी किया है। चोरी के मामलों में पुलिस जांच कर रही है। 

 

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लगातार तीन मंदिरों में चोरी

अंतरराज्यीय चोर गिरोह के सदस्यों ने 17 दिसंबर को थाबे मंदिर से लगभग 55 लाख रुपये के जेवरात की चोरी की। इस घटना में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का दीपक राय शामिल था। उससे पूछताछ के बाद मोहम्मद इजमामुल को पकड़ा गया। उसने अपनी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर गोली चला दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए गोली चलाई। हाफ इनकाउंटर में वह जख्मी हो गया। अभी चोरी का माल बरामद नहीं हुआ है। एसआईटी अपना काम कर रही है। 

 

इधर छपरा के मशरख में स्थित राम जानकी मंदिर से चोरों ने 18वीं शताब्दी की अष्ट धातु की बनी राम जानकी और लक्ष्मण की मूर्ति चुरा ली। मंदिर थाने से सटा हुआ है। चोरों ने गर्भ गृह को काटकर चोरी की इस घटना को अंजाम दिया। उधर मधेपुरा के भर्राहि  थाना क्षेत्र में चोरों ने 14.7 किलोग्राम अष्ट धातु से बनी भगवान की प्रतिमा को गायब कर दिया। चोर अपने साथ मंदिर की दान पेटी भी लेते गए। इससे पहले समस्तीपुर, बक्सर, कटिहार, पूर्णिया और औरंगाबाद में भी मंदिरों से भी प्राचीन मूर्तियों की चोरी हो चुकी है।

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस का कहना है कि मंदिरों में चोरी के पीछे पेशेवर अपराधियों का हाथ है। वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि इन मूर्तियों को बेचकर वे मोटी रकम कमा सकते हैं। मंदिरों के प्राचीनता का डेटा भी उनके पास उपलब्ध रहता है। मूर्ति चोरों का अपना एक अलग नेटवर्क है। पुलिश को शक है कि धार्मिक भावना को भड़काने के लिए भी इस तरह की घटना को अंजाम दिया जा सकता है।

 

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नहीं होता आदेश का पालन

पुलिस मुख्यालय समय समय पर मंदिरों की सुरक्षा को लेकर आदेश जारी करता रहता है लेकिन निचले स्तर के पुलिस पदाधिकारी उसका पालन नहीं करते हैं। गोपालगंज के थाबे मंदिर में पुलिस शिविर खोला गया था लेकिन जिस दिन चोरों ने घटना को अंजाम दिया, उस दिन पुलिस पदाधिकारी और जवान शिविर से गायब थे। रात की गश्त के दौरान पुलिस कर्मियों को मंदिरों का भी जायजा लेने के आदेश हैं लेकिन पुलिस वाले मंदिरों की सुरक्षा से बेखबर रहते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बिहार के मंदिरों में चोरी की घटनाओं को रोकेगा कौन।


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