उत्तर प्रदेश के उन्नाव में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को दिए गए गद्दों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि इन गद्दों के कवर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के झंडे और उसके चुनाव चिन्ह जैसी डिजाइन छपी हुई थी। यह मामला सामने आते ही हंगामा मच गया। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने गद्दे सप्लाई करने वाले सप्लायर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में गद्दों की सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। कंपनी के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई है और इस मामले में जुड़े कर्मचारियों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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459 जोड़ों को दिए गए 918 गद्दे
जिला प्रशासन के अनुसार, 24 जुलाई को डॉ वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 459 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। योजना के तहत प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को दो-दो गद्दे उपहार में दिए गए। इस तरह कुल 918 गद्दों का वितरण किया गया। बाद में कुछ गद्दों के कवर पर छपी डिजाइन को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।
एक-दो गद्दों पर मिली विवादित डिजाइन
जांच समिति की रिपोर्ट में पता चला कि कुल 918 गद्दों में से सिर्फ एक-दो गद्दों के कवर पर ऐसी डिजाइन थी, जो देखने में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिन्ह और झंडे जैसी लग रही थी। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उन गद्दों पर बने रंगों का क्रम और डिजाइन TMC के असली झंडे से पूरी तरह मेल नहीं खाता था। फिर भी मामले को गंभीर मानते हुए इसकी विस्तार से जांच कराई गई।
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जिला मजिस्ट्रेट घनश्याम मीणा ने मुख्य विकास अधिकारी (SDO) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। समिति में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), वरिष्ठ कोषाधिकारी और उद्योग विभाग के उप आयुक्त को भी शामिल किया गया। समिति ने जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी।
सप्लायर पर कार्रवाई, कर्मचारी निलंबित
जांच रिपोर्ट आने के बाद गद्दों की सप्लाई करने वाली फर्म को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। उसके खिलाफ कोतवाली थाने में FIR भी दर्ज कराई गई है। वहीं, गद्दों का सामान रिसीव करने वाले पटल सहायक (लिपिक) को भी तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, गिफ्ट बांटने की जिम्मेदारी संभाल रहे सहायक विकास अधिकारी (ADO) और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। दूसरी ओर, पूरे मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी से भी जवाब तलब किया गया है।