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ट्राउट मछली से तगड़ी कमाई करेगा कुल्लू, सरकार बनाएगी ब्रूड बैंक

ट्राउट उत्पादन के लिए मशहूर कुल्लू के पतलीकुहल में हिमाचल का पहला ब्रूड बैंक बनने जा रहा है। यहां बेहतरीन नस्ल की ट्राउट मछली पैदा होगी।

ट्राउट फार्म का निरीक्षण करते निदेशक, Photo Credit-DPR Kullu

ट्राउट फार्म का निरीक्षण करते निदेशक, Photo Credit-DPR Kullu

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हिमाचल की ठंडी नदियों और पहाड़ी जलधाराओं में पाली जाने वाली ट्राउट मछली के उत्पादन को अब नई दिशा देने की तैयारी है। पतलीकुहल में प्रदेश का पहला ट्राउट ब्रूड बैंक तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ट्राउट के गुणवत्तापूर्ण प्रजनन के लिए जरूरी ब्रूड स्टॉक यानी प्रजनन योग्य मछलियों को वैज्ञानिक तरीके से तैयार और संरक्षित करना है।

परियोजना पूरी होने के बाद प्रदेश में ट्राउट के बीज (फिंगरलिंग/फ्राई) की उपलब्धता बेहतर होने और मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मत्स्य विभाग के निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य हिमाचल प्रदेश ओमकांत ठाकुर ने कुल्लू और लाहौल-स्पीति के दौरे के दौरान पतलीकुहल ट्राउट फार्म पहुंचकर निर्माणाधीन ब्रूड बैंक का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

क्या है ट्राउट ब्रूड बैंक?

ट्राउट ब्रूड बैंक को सरल शब्दों में ‘अच्छी नस्ल की प्रजनन मछलियों का बैंक’ कहा जा सकता है। इसमें स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण ट्राउट मछलियों का ब्रूड स्टॉक तैयार किया जाता है। इन्हीं मछलियों से आगे ट्राउट के अंडे और बीज तैयार किए जाते हैं, जिन्हें मत्स्य पालकों तक पहुंचाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
हिमाचल में ट्राउट पालन के लिए ठंडा और साफ पानी सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। कुल्लू और लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में इसके लिए प्राकृतिक परिस्थितियां अनुकूल हैं। ऐसे में ब्रूड बैंक स्थापित होने से ट्राउट बीज उत्पादन को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

मत्स्य पालकों को क्या फायदा होगा?

ब्रूड बैंक के जरिए बेहतर गुणवत्ता वाले प्रजनन स्टॉक और ट्राउट बीज की उपलब्धता बढ़ने पर प्रदेश के ट्राउट पालकों को लाभ मिल सकता है। इससे ट्राउट पालन के विस्तार, उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। लंबे समय में प्रदेश को गुणवत्तापूर्ण ट्राउट बीज के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। निदेशक ने ट्राउट फार्म पतलीकुहल के अधीन संचालित ट्राउट हैचरी बटाहर का भी निरीक्षण किया। यहां तैयार किए जा रहे ट्राउट ब्रूड स्टॉक की स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने आगामी महीनों में होने वाले ट्राउट प्रजनन से बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद जताई।

 

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ट्राउट से तैयार भोजन भी बाजार में आएगा

पतलीकुहल में सिर्फ ट्राउट उत्पादन पर ही जोर नहीं दिया जा रहा, बल्कि इसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट के रूप में बाजार तक पहुंचाने की तैयारी भी है। निदेशक ने यहां तैयार की जा रही रेडी-टू-ईट सोमकड ट्राउट फिश कैनिंग यूनिट का निरीक्षण किया। उन्होंने मशीनरी और उपकरणों की स्थापना जल्द पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि यूनिट का संचालन शुरू हो सके। इससे ट्राउट को केवल ताजा मछली के रूप में बेचने के बजाय उसे प्रोसेस कर लंबे समय तक उपयोग योग्य उत्पाद में बदलने का रास्ता खुलेगा। इससे मत्स्य विभाग और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आपदा से तबाह हुई जलापूर्ति व्यवस्था होगी बहाल

वर्ष 2025 की भारी बारिश और आपदा से पतलीकुहल ट्राउट फार्म की जलापूर्ति लाइन और वाटर इनटेक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। ट्राउट पालन के लिए लगातार और पर्याप्त ठंडे पानी की आपूर्ति बेहद जरूरी है। ऐसे में जलापूर्ति व्यवस्था की बहाली को फार्म के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निदेशक ने मौके का निरीक्षण कर जल शक्ति विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा की तथा इस काम को तत्काल शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।निदेशक ने पतलीकुहल फार्म में संचालित प्रदेश की पहली कोल्ड वाटर रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) का भी निरीक्षण किया। इस प्रणाली में पानी को वैज्ञानिक तरीके से उपचारित कर दोबारा उपयोग किया जाता है। उन्होंने यहां पल रही ट्राउट मछलियों की प्रगति देखी और इसे विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

 

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सिस्सू झील में एंगलिंग से पर्यटन को मिलेगा नया एंगल

लाहौल-स्पीति में मत्स्य गतिविधियों के विस्तार के लिए निदेशक ने सिस्सू में विभागीय भूमि का भी निरीक्षण किया। यहां विभागीय कार्यालय शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके अलावा सिस्सू झील में एंगलिंग पर्यटन शुरू करने की संभावनाओं का भी जायजा लिया गया। यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो पर्यटकों के लिए एक नई गतिविधि विकसित हो सकती है। इससे स्थानीय रोजगार, पर्यटन कारोबार और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही विभाग के राजस्व में भी वृद्धि हो सकती है।

पतलीकुहल में ब्रूड बैंक, हैचरी, आरएएस और फिश प्रोसेसिंग यूनिट को एक साथ विकसित करने की पहल हिमाचल में ट्राउट को सिर्फ मछली पालन तक सीमित रखने के बजाय बीज उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और पर्यटन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।


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