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उज्जैन की शाही मस्जिद के बाहर ध्वस्तीकरण से पहले हंगामा, पुलिस पर हुआ पथराव

उज्जैन की शाही मस्जिद के बाहर फैला तनाव अब हिंसक झड़प का रूप ले चुका है और पुलिस की टीम पर भी पथराव हुआ है। इस झड़प में कई लोग घायल भी हुए हैं।

shahi masjid ujjain

शाही मस्जिद, उज्जैन, Photo Credit: PTI

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मध्य प्रदेश के उज्जैन से रविवार को दो तस्वीरें सामने आईं। एक तरफ उज्जैन में ही मुख्यमंत्री मोहन यादव गैंती लेकर अपना पैतृक घर तोड़ने की शुरुआत कर रहे थे। दूसरी तरफ उज्जैन की ऐतिसाहिक शाही मस्जिद के बाहर लोग भारी संख्या में जुट गए क्योंकि इसके भी कुछ हिस्सा तोड़ा जाना था। रविवार को बढ़ता रहा तनाव अब सोमवार को हिंसक झड़प में बदल गया है। शाही मस्जिद के पास जुटी भीड़ ने पुलिस की टीम पर पथराव कर दिया है और जवाब में पुलिस ने भी आंसू गैस के गोले दागे हैं। इस झड़प में पुलिस के जवानों के साथ-साथ कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए हैं।

 

स्थिति को देखते हुए रविवार से ही शाही मस्जिद के बाहर बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस के अलावा रैपिड ऐक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात किया गया है। सोमवार को बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश कर रही भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया। इसी के बाद पुलिस की ओर से भी आंसू गैस के गोले दागे गए। 

 

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क्यों हो रहा है ध्वस्तीकरण?

दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ साल 2028 में लगना है। इसी के लिए अभी से तैयारियां हो रही हैं। उज्जैन शहर के रास्तों को चौड़ा किया जा रहा है और नए सिरे से योजना बनाई जा रही है। इसी के मद्देनगर काफी समय से ध्वस्तीकरण और रेनोवेशन का काम चल रहा है। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर जाने वाले रास्ते को भी चौड़ा किया जाना है। इसी रास्ते पर माधवराव सिंधिया की मूर्ति वाले चौक पर शाही मस्जिद मौजूद है। ध्वस्तीकरण की योजना के मुताबिक, इस मस्जिद के भी कुछ हिस्से को तोड़ा जाना है।

 

इसी हिस्से को प्रशासन ने हरे पर्द से ढक रखा है और मुस्लिम समुदाय के लोग आक्रोशित हैं। इस ध्वस्तीकरण को रुकवाने के लिए हाई कोर्ट में भी अपील दायर की गई है और आज ही इस पर सुनवाई भी होनी है।

 

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कांग्रेस सांसद ने की अपील

इस मामले पर एक दस्तावेज शेयर करते हुए कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने लिखा है, 'सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उज्जैन शाही मस्जिद को तोड़ने की प्रशासनिक कवायद को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिए। 600 साल पुरानी धरोहर को सिर्फ सड़क चौड़ीकरण और विकास के नाम पर ध्वस्त कर देना तो नफ़रत की पराकाष्ठा है। मेरे संज्ञान में आया है कि मामला जब न्यायालय में लंबित है तो फिर प्रशासन बार-बार मस्जिद की घेराबंदी करके आख़िर क्या संदेशा देना चाहता है? उज्जैन के हज़ारों युवा लगातार इस मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं। उज्जैन प्रशासन से मेरा अनुरोध है कि जन भावनाओं का सम्मान करिए और सड़क चौड़ीकरण के लिए आवश्यक ज़मीन दूसरी साइड से ले लीजिए। इतनी एैतिहासिक धरोहर को तोड़ा जाना कहीं से भी सामान्य घटना नहीं मानी जाएगी।'

बता दें कि इसी तरह का ध्वस्तीकरण उज्जैन के कई इलाकों में चल रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृतक आवास अब्दालपुरा इलाके में है और उसके भी कुछ हिस्से को तोड़ा जाना है। रविवार को खुद मोहन यात्रा गैंती लेकर प्रतीकात्मक तौर पर ध्वस्तीकरण करते दिखे थे। 

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