उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज दिवाकर की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें उन्होंने कहा कि वह कायर जज कहलाने के बजाय मौत को पसंद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर चलते रहेंगे, तब तक अपनी नौकरी करते रहेंगे लेकिन अगर उन्हें अपने सिद्धांतों से समझौता करना पड़ा तो वह इस्तीफा दे देंगे।
सोमवार को दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाते हुए जज दिवाकर ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें भगवान से डरना सिखाया है किसी और से नहीं। उन्होंने कहा कि यदि कोई जज अपराधियों के डर से अपने कर्तव्यों का पालन करता है तो इससे न्यायपालिका के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर होगा।
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जज की चिट्ठी का वायरल हिस्सा
जज रवि दिवाकर ने 23वीं फांसी की सजा सुनाते हुए फैसले में लिखा कि वह कायर जज कहलाने के बजाय मौत को पसंद करेंगे। उन्होंने कहा, 'जब तक वह अपने सिद्धांतों के अनुसार न्यायिक जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम हैं तब तक अपने पद पर काम करते रहेंगे।' जज दिवाकर ने दावा किया कि उन्हें माफिया और अपराधियों की ओर से धमकियां मिल रही हैं। इस पर उन्होंने लिखा, 'मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना पसंद नहीं करूंगा।'
इस फैसले में उन्होंने लिखा, 'मुक्षे पश्चिम के एक माफिया/गैंगस्टर द्वारा यह संदेश भी भिजवाया गया कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियां हटवाई है, अगर मेरे पीछे पड़े तो जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे।'
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पहले भी चर्चा में रहे हैं जज दिवाकर
रवि कुमार दिवाकर ने 2009 में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में सिविल जज के तौर पर शुरुआत की थी। वह सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली समेत कई जिलों में सेवा दे चुके हैं। नवंबर 2025 से वह मुजफ्फरनगर में तैनात हैं। 2022 में वाराणसी में सिविल जज रहते हुए उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने धमकी भरे फोन आने की बात कही थी। मार्च 2024 में बरेली दंगों से जुड़े एक आदेश में मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ
को प्लेटो के दाशर्निक राजा का उदाहरण बताए जाने के बाद भी वह चर्चा में आए थे। बाद में इलाहाबात हाई कोर्ट ने आदेश से इन टिप्पणियों को हटा दिया था।