logo

मूड

ट्रेंडिंग:

UP में नहीं महंगी होगी बिजली? पलटा जा सकता है 10% अतिरिक्त चार्ज वाला फैसला

हाल ही में उत्तर प्रदेश में बिजली के बिल 10 प्रतिशत महंगे होने की खबर सामने आई थी। अब चर्चा है कि यह फैसला पलटा जा सकता है।

up electricity bill

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Social Media

शेयर करें

google_follow_us

उत्तर प्रदेश के 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से जून माह के बिल में प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली पर रोक लग सकती है। फ्यूल सरचार्ज के नाम पर करीब 1610 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं से वसूलने के पावर कॉरपोरेशन के फैसले पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने प्रथम दृष्टया मामले में कई विसंगतियां पाते हुए पावर कॉरपोरेशन से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।

 

आयोग की ओर से जारी नोटिस के बाद बिजली विभाग और पावर कॉरपोरेशन में हलचल तेज हो गई है। सोमवार को ही अधिकारियों ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि अभी तक अतिरिक्त बिल वसूली पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है लेकिन आयोग की सख्ती के बाद करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

 

बिजली खरीद लागत को लेकर उठे बड़े सवाल

यह भी पढ़ें: 8 हजार कर्ज देकर 111 करोड़ मांग रहा सूदखोर, महिला पहुंची DM के पास

 

आयोग के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आयोग के समक्ष दावा किया है कि पावर कॉरपोरेशन ने फ्यूल एवं पावर सरचार्ज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) की गणना में गंभीर अनियमितताएं की हैं। उनका कहना है कि वित्तीय वर्ष के टैरिफ आदेश में नियामक आयोग ने बिजली खरीद की औसत लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट मंजूर की थी, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दर्शाकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का प्रयास किया है।

 

परिषद का आरोप है कि मार्च माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ-साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने दावे और पूर्व अवधि की देनदारियों को भी जोड़ दिया गया, जबकि नियामकीय व्यवस्था इसकी अनुमति नहीं देती। ऐसे में उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय भार डाला जा रहा है।

'बिल बढ़ना नहीं, दो प्रतिशत कम होना चाहिए था'

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि यदि आयोग द्वारा निर्धारित मानकों और नियमों के अनुसार FPPCA की गणना की जाए तो जून माह में बिजली बिल बढ़ने के बजाय करीब दो प्रतिशत कम होना चाहिए।


परिषद ने आयोग के समक्ष दाखिल अपने प्रत्यावेदन में कहा है कि पावर कॉरपोरेशन ने गलत आधार पर फ्यूल सरचार्ज की गणना कर करोड़ों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली की योजना बनाई है। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: प्रीपेड मीटर के नाम पर लिए गए थे पैसे, अब लौटाएगा बिजली विभाग, तरीका जान लीजिए

29 मई को जारी हुआ था वसूली का आदेश

पावर कॉरपोरेशन ने 29 मई को आदेश जारी करते हुए मार्च माह की फ्यूल सरचार्ज लागत को उपभोक्ताओं से वसूलने का निर्णय लिया था। इसके तहत घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं से जून माह के बिल में लगभग 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि वसूली जानी थी। कॉरपोरेशन का अनुमान है कि इस व्यवस्था से करीब 1610 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली होगी।

 

बिजली दरों में अप्रत्यक्ष बढ़ोतरी के विरोध में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में विस्तृत प्रत्यावेदन दाखिल किया। परिषद ने मांग की कि फ्यूल सरचार्ज के नाम पर की जा रही अतिरिक्त वसूली की जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक वसूली पर रोक लगाई जाए। परिषद का कहना है कि महंगाई के दौर में पहले से ही उपभोक्ता आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में गलत गणना के आधार पर हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली न्यायसंगत नहीं है।

आयोग के फैसले पर रहेगी नजर

नियामक आयोग की ओर से सात दिन में जवाब तलब किए जाने के बाद अब प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की निगाहें अगले फैसले पर टिक गई हैं। अगर आयोग पावर कॉरपोरेशन के जवाब से संतुष्ट नहीं होता और उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों को सही पाता है तो जून माह में प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल वसूली पर रोक लग सकती है।


ऐसी स्थिति में प्रदेश के 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी और बिजली बिल में संभावित बढ़ोतरी टल सकती है। वहीं, अगर आयोग ने पावर कॉरपोरेशन के पक्ष को स्वीकार कर लिया तो उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है।

Related Topic:#UP News

और पढ़ें