उत्तर प्रदेश में एक बार फिर सरकार ब्राह्मण समुदाय के निशाने पर आई है। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) के प्रश्नपत्र पर हंगामा बरपा है। शनिवार को उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती के लिए दो दिवसीय लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। उसमें अवसरवादिता से जुड़ा एक सवाल पूछा गया, जिसके विकल्प में पंडित को रखा गया।
जैसे ही लोग पेपर देकर निकले, यूपी में सियासी हंगामा बरप गया। UPPRPB और योगी सरकार, दोनों अब ब्राह्मण समुदाय के निशाने पर हैं। परीक्षा का एक हिस्सा शनिवार को हुआ, एक रविवार को भी होगा। पहले शिफ्ट में अभ्यर्थियों को 26 पेज का प्रश्नपत्र दिया गया था, जिसे 5 खंडों में बांटा गया था। हर खंड में 40 सवाल थे।
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हंगामा क्यों बरपा?
सामान्य हिंदी खंड के 31वें सवाल पर हंगामा बरपा। सवाल में वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनना था। सवाल था, 'अवसर के अनुसार बदल जाने वाला। जवाब में 4 विकल्प दिए गए थे। सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट।
विवाद की असली वजह क्या है?
इस प्रश्न और विकल्पों पर गंभीर आपत्तियां उठी हैं।'पंडित' को विकल्प में शामिल करने से ब्राह्मण तबका नाराज है। लोग इसे ब्राह्मण समुदाय के लिए अपमानजनक माना जा रहा है।
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ब्रजेश पाठक, डिप्टी सीएम, उत्तर प्रदेश:-
'उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है । सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।'
ब्रजेश पाठक ने कहा, 'मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है। प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।'
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बोर्ड क्या कह रहा है?
बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक ने शनिवार रात देर से X पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि 14 मार्च 2026 की पहली शिफ्ट के संबंधित प्रश्न पर जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
सफाई क्या दे रहा है बोर्ड?
बोर्ड का कहना है कि पुलिस भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बोर्ड खुद स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं करता, बल्कि गोपनीय संस्थाओं के जरिए बनवाए जाते हैं, जिससे पेपर लीक न हो। गोपनीयता बनाए रखने के लिए बोर्ड का कोई अधिकारी या कर्मचारी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र नहीं देख सकता। बोर्ड का कहना है कि सील बंद पैकेट परीक्षा केंद्रों पर हॉल में अभ्यर्थियों की उपस्थिति में खोले जाते हैं, उसके बाद वितरण होता है।
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BJP सरकार क्यों घिरी? वजहें समझिए
UGC विवाद और सरकार की किरकिरी
यह विवाद ऐसे वक्त में उभरा है, जब बीजेपी सरकार यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए नियमों को लेकर सवर्णों के निशाने पर है। सरकार से ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी की भी बात सामने आ रही है।
ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद बवाल
दिसंबर में उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण विधायकों की बैठक हुई। विधायकों ने भेदभाव का मुद्दा इस बैठक में उठाया। बैठक पार्टी के भीतर अच्छी नहीं रही। कुछ दिनों बाद नए राज्य अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सार्वजनिक पत्र जारी कर जाति, समुदाय या समूह आधारित बैठकों से बचने की चेतावनी दी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही। पत्र पर कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए और कहा कि सरकार में ब्राह्मणों की आवाज दबाई जा रही है। जाति विशेष को बढ़ावा दिया जा रहा है। समाजवादी पार्टी और बसपा ने ब्राह्मण समुदाय का समर्थन किया और बीजेपी की आलोचना की।
बढ़ता विरोध बीजेपी के लिए खतरा है?
मार्च की शुरुआत में ही लखनऊ के एक ऑडिटोरियम में ब्राह्मणों की सभा में पूर्व उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के खिलाफ लगे और उन्हें संबोधन रोकना पड़ा। आरोप लगे कि उन्होंने समुदाय के लिए आवाज नहीं उठाई और यूजीसी विवाद पर चुप्पी साधी। एक बार फिर राज्य में ब्राह्मणों पर हंगामा बरपा है।