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हर्निया और बवासीर बताकर करते थे एडमिट, निकाल लेते थे महिलाओं की बच्चेदानी

पटना के अस्पताल ने महिलाओं को हर्निया और बवासीर का झांसा देकर धोखे से उनकी बच्चेदानी निकाल ली। सिविल सर्जन की रिपोर्ट में अस्पताल के इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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बिहार की राजधानी पटना के एक प्राइवेट अस्पताल ने इलाज के नाम पर मासूम महिलाओं के साथ रोंगटे खड़े कर देने वाला धोखा किया है। अस्पताल ने यहां भर्ती होने वाली महिलाओं को हर्निया और बवासीर जैसी बीमारियों का डर दिखाया और फिर ऑपरेशन के बहाने बिना उनकी जानकारी के उनके बच्चेदानी ही निकाल ली। इस पूरे फर्जीवाड़े की पुष्टि पटना के सिविल सर्जन की जांच रिपोर्ट में हुई है, जिससे यह साफ हो गया है कि अस्पताल ने सिर्फ मोटी कमाई के लिए मेडिकल नियमों की धज्जियां उड़ाई।

 

इस साजिश का शिकार अनिता देवी, सुनीता देवी और ममता देवी जैसी कई महिलाएं हुई हैं। इतना ही नहीं, अपनी करतूत छुपाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने एक जिंदा महिला को कागजों में मरा हुआ तक घोषित कर दिया था। जिसने बाद में खुद सामने आकर अस्पताल के झूठ का पर्दाफाश किया।

 

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अस्पताल का यह काला कारनामा तब शुरू हुआ जब 10 अक्टूबर 2025 को अनिता देवी को हर्निया के इलाज के लिए भर्ती किया गया था। इसके बाद 12 अक्टूबर 2025 को उनका ऑपरेशन किया गया। अनीता को बताया गया था कि उनका हर्निया ठीक कर दिया गया है लेकिन बाद में जांच में पता चला कि डॉक्टरों ने धोखे से उनकी बच्चेदानी निकाल ली थी। ठीक इसी तरह का मामला सुनीता देवी और ममता देवी के साथ भी हुआ, जिन्हें बवासीर और अन्य बीमारियों का बहाना बनाकर इसी तरह के गलत ऑपरेशन का शिकार बनाया गया।

जांच रिपोर्ट में खुली फर्जीवाड़े की पोल

जब पीड़ित महिलाओं ने अपनी खराब होती हालत को लेकर शिकायत दर्ज कराई तो सिविल सर्जन की टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को खंगाला। जांच रिपोर्ट में यह बात साबित हो गई कि मरीजों को सर्जरी के बारे में गलत जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि अस्पताल ने बिना किसी ठोस मेडिकल जरूरत के और बिना मरीज की मर्जी के उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंग निकाल दिए। 

अस्पताल की तरफ से दी गई सफाई

जब यह मामला बढ़ने लगा, तो अस्पताल प्रबंधन ने खुद को बचाने के लिए अजीबोगरीब दलीलें दीं। अनीता देवी के मामले में अस्पताल का दावा था कि उनकी बच्चेदानी का ऑपरेशन पहले ही कहीं और हो चुका था और वह उनके पास सिर्फ हर्निया के लिए आई थीं लेकिन सिविल सर्जन की रिपोर्ट ने अस्पताल के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। अस्पताल ने तो अपनी गलती छुपाने के लिए कागजों में हेरफेर करते हुए एक जीवित महिला को 'मृत' तक दिखा दिया था, जो बाद में अधिकारियों के सामने जिंदा हाजिर हो गई।

 

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अस्पताल पर होगा बड़ा ऐक्शन

सिविल सर्जन की रिपोर्ट में जुर्म साबित होने के बाद अब प्रशासन इस अस्पताल पर सख्त कार्रवाई करने के मूड में है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने का काम शुरू कि दिया है और इसमें शामिल डॉक्टरों पर पुलिस केस दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। इस घटना के बाद पूरे बिहार के प्राइवेट अस्पतालों में खौफ का माहौल है और सरकार ने साफ कर दिया है कि जो भी अस्पताल लोगों की जान से खेलेगा, उसे किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। 

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