महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर तुरंत पुलिस मदद देने और उनकी शिकायतें सुरक्षित तरीके से पुलिस तक पहुंचाने के लिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिंक बूथ बनाए गए थे। अब यही पिंक बूथ अपनी बदहाली की कहानी बता रहे हैं। लखनऊ में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुल 99 पिंक बूथ बनाए गए थे।
पिंक बूथ पर 194.44 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। कई पिंक बूथ बंद पड़े मिले, तो कई जगह गंदगी, जलभराव और दूसरी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
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महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए थे पिंक बूथ
दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लखनऊ में सेफ सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके तहत शहर की प्रमुख सार्वजनिक जगहों और संवेदनशील इलाकों में पिंक बूथ बनाए गए। इनका मकसद था कि जरूरत पड़ने पर महिलाओं और युवतियों को तुरंत पुलिस की मदद मिल सके।
इन पिंक बूथों पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, ताकि छेड़छाड़, उत्पीड़न, घरेलू हिंसा या किसी दूसरी परेशानी का सामना करने वाली महिलाएं बिना किसी झिझक के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। जरूरत पड़ने पर उन्हें संबंधित थाने या महिला हेल्प डेस्क तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई थी।
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बदहाल हालत में पिंक बूथ
राणा प्रताप मार्ग और हजरतगंज इलाके में नेशनल पीजी कॉलेज के पास बना पिंक बूथ बदहाल हालत में मिला। बूथ तक जाने वाला रास्ता गंदगी से भरा हुआ है। ऐसे में कॉलेज आने-जाने वाली छात्राओं और आसपास से गुजरने वाली महिलाओं के लिए यहां पहुंचना आसान नहीं है।
वहीं, बेगम हजरत महल पार्क के पास पाथ-वे पर बने पिंक बूथ तक पहुंचने का रास्ता भी परेशानी वाला है। रास्ता ऊंचा होने की वजह से बुजुर्ग महिलाओं और युवतियों को यहां पहुंचने में दिक्कत हो सकती है। जिस पिंक बूथ को महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब उनके लिए परेशानी का सबब बनता नजर आ रहा है।
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कहीं ताला लटका मिला तो कहीं गंदगी का अंबार
शहर के अलग-अलग इलाकों में पिंक बूथों की स्थिति में बड़ी खामियां सामने आईं। कई जगह बूथ बंद मिले और कुछ स्थानों पर आसपास का माहौल ही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया। सरोजनीनगर थाना क्षेत्र में चार पिंक बूथ बनाए गए हैं। हाईडिल चौकी के पास स्थित पिंक बूथ दोपहर के समय बंद मिला। ऐसे में दिन में भी यदि किसी महिला को तत्काल पुलिस सहायता की जरूरत पड़े तो वह कहां जाए, यह बड़ा सवाल है।आशियाना में पिंक बूथ संख्या 31 दोपहर करीब सवा तीन बजे तक बंद मिला। दूर-दराज से आने वाली महिलाओं को जब बूथ पर मदद नहीं मिलती तो उन्हें वापस लौटना पड़ता है। इससे पिंक बूथों के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
बूथ पर महिला सिपाही भी परेशान
स्कूटर्स इंडिया क्षेत्र में बूथ संख्या 75 पर तैनात महिला पुलिसकर्मी खुद कई समस्याओं से जूझती नजर आईं। बूथ के आसपास खुला नाला है, जो सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी परेशानी का कारण बना हुआ है। बूथ पर महिला पुलिसकर्मियों के लिए पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया गया। ऐसे में सवाल सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा का नहीं, बल्कि उन महिला पुलिसकर्मियों की सुविधाओं का भी है जिन्हें इन बूथों पर बैठकर महिलाओं की मदद करनी है।
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रात में बंद हो जाते हैं बूथ, कैसे मिलेगी मदद?
सबसे बड़ा सवाल रात के समय महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठता है। रात में पिंक बूथ बंद कर दिए जाते हैं और वहां तैनात पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं रहते। ऐसे में अगर रात के समय किसी महिला के साथ कोई घटना हो जाए और उसे तुरंत पुलिस की मदद की जरूरत पड़े तो वह पिंक बूथ उसके कितने काम आएगा?
पिंक बूथ बनाने का मकसद ही यही था कि महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित माहौल मिले और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत पुलिस की मदद मिल सके। अगर रात में बूथ बंद मिलें और वहां कोई पुलिसकर्मी मौजूद न हो तो ऐसे में पिंक बूथ शुरू करने का पूरा मकसद ही सवालों के घेरे में आ जाता है।