वाराणसी नगर निगम ने रविवार को शहर को लेकर एक अहम फैसला किया है। नगर निगम ने शहर को व्यवस्थित और स्वच्छ रखने की दिशा में कदम उठाते हुए अब मांस और मछली की सभी दुकानें शहर की सीमा से बाहर बसाने का फैसला किया है। इस पहल के तहत, सभी मीट और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर ले जाया जाएगा।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल भवन में आयोजित सदन की बैठक हुई। इस बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है।
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यहां बिकेगा मांस
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने हाउस को बताया कि प्लान के पहले फेज के लिए पांच जगहें चुनी गई हैं। ये सभी जगहें शहर की बाहरी सीमाओं के पास हैं ताकि आम लोगों को कोई परेशानी न हो। आने वाले दिनों में, शहर में अभी चल रही मीट और मछली की दुकानों को रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर इलाकों में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
शहर में लगभग 350 से 400 मीट दुकानें
संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में शहर के विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें मांस के बाजारों को शहर के बाहरी छोर पर बसाने करने का फैसला लिया गया। उन्होंने बताया कि शहर में अभी लगभग 350 से 400 मीट व मछली की दुकानें हैं। पार्षद गुलशन अली ने नगर पालिका परिषद की बैठक में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर ले जाने का प्रस्ताव लगभग एक साल पहले लाया गया था लेकिन इसे अभी तक ठीक तरीके से लागू नहीं किया गया।
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लोगों की आजीविका पर बुरा असर
उन्होंने व्यापारियों की चिंता के बारे में बताते हुए कहा कि पवित्र श्रावण महीने के दौरान मांस की सभी दुकानों को बंद रखने से गोश्त के कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता है। नगर आयुक्त ने इसका जवाब देते हुए सदन को भरोसा दिलाया कि शहर के बाहरी इलाके में जमीन की पहचान कर ली गई है और प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी।
नत्थूपुर में मांस की दुकान के मालिक अशरफ ने कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर से बाहर ले जाने से व्यापारियों व ग्राहकों दोनों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को मांस-मछली की खरीदारी के लिए शहर से बाहर जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन, दोनों का ही अतिरिक्त खर्च होगा। अशरफ ने कहा, 'हम चाहते हैं कि प्रशासन व्यापारियों और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकाले।'