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'90 हजार दो... केस रफा-दफा हो जाएगा', रिश्वत लेते दरोगा जी ही धर लिए गए

बिहार के नालंदा में निगरानी विभाग की टीम ने एक दारोगा को 90 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। इस मामले की शिकायत डॉक्टर रवि शंकर कुमार ने की थी।

representative image of Sub-Inspector caught

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Chatgpt Generated Image)

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संजय सिंह, पटना: बिहार के नालंदा जिले से भ्रष्टाचार की एक बड़ी खबर सामने आई है। राजगीर थाना क्षेत्र में निगरानी विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दारोगा को 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार दारोगा की पहचान देवकांत कुमार के रूप में हुई है, जो राजगीर थाना में तैनात थे। जानकारी के अनुसार, यह मामला आर्म्स एक्ट के एक केस से जुड़ा हुआ है।

 

शिकायतकर्ता डॉक्टर रवि शंकर कुमार का आरोप है कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया था और मामले को ठीक करने के नाम पर पहले ही 20 हजार रुपये लिए जा चुके थे। आरोप है कि इसके बाद दारोगा ने एक लाख रुपये की और मांग की। बातचीत के बाद यह रकम 90 हजार रुपये पर तय हुई। परेशान होकर डॉक्टर ने इसकी जानकारी निगरानी विभाग को दे दी, जिसके बाद विभाग की टीम ने दारोगा को पकड़ने की योजना बनाई।

 

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निगरानी की टीम ने बिछाया जाल

DSP श्रीराम चौधरी के नेतृत्व में निगरानी की टीम ने राजगीर के गिरियक मार्ग पर अपना जाल बिछाया। जैसे ही डॉक्टर ने तय किए हुए 90 हजार रुपये दारोगा देवकांत कुमार को थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी टीम ने उन्हें तुरंत दबोच लिया। गिरफ्तारी के समय दारोगा के पास से रिश्वत के सारे पैसे बरामद कर लिए गए। इस अचानक हुई कार्रवाई से दारोगा को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

 

इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी दारोगा को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि क्या इस खेल में थाने के कुछ और लोग भी शामिल थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही पैसे लेकर गलत काम करने लगें तो जनता न्याय के लिए कहां जाएगी। हालांकि, निगरानी विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से आम लोगों के बीच एक अच्छा संदेश गया है कि भ्रष्टाचार करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे।


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