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पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चुनाव आयोग और TMC का नया पंगा क्या है? समझिए कहानी

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 58.2 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए थे। राजनीतिक पार्टियों ने इस पर हंगामा किया था। पढ़ें रिपोर्ट।

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (Photo Credit: MamataBanerjee/X)

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पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत राजनीतिक पार्टियों ने योग्य मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए कुल सिर्फ 8 दावे और आपत्तियां जमा की हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, ये दावे 31 दिसंबर तक जमा हुए। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 630 मतदाताओं के नाम हैं।

राजनीतिक पार्टियों से मिले के आंकड़े भी दिलचस्प हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 1 आपत्ति दर्ज कराई है, मक्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने 2 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई है। तृणमूल कांग्रेस ने 3 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। बहुजन समाज पार्टी ने 1 आपत्ति दर्ज कराई है। ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 1 आपत्ति जताई है।  

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चुनाव आयोग को कितने आवेदन मिले?

आम मतदाताओं से सीधे नाम जोड़ने के लिए, फॉर्म 6 के लिए 1 लाख 74 हजार 459 आवेदन आए हैं। नाम हटाने (फॉर्म 7) के लिए 37 हजार 781 आवेदन मिले हैं। CEO कार्यालय ने बताया कि अभी तक किसी ने भी विशेष शपथ पत्र जमा नहीं किया है। 

अंतिम वोटर लिस्ट कब आएगी?

सभी योग्य मतदाताओं और पार्टियों से अपील की गई है कि वे ड्राफ्ट लिस्ट जांचें और 15 जनवरी तक कोई दावा या आपत्ति जमा करें। दिसंबर में जारी ड्राफ्ट लिस्ट में पहले की तुलना में 58 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए थे, जिस पर काफी विवाद हुआ था। अब अंतिम वोटर लिस्ट फरवरी में आएगी।

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पश्चिम बंगाल में क्या बवाल हो रहा है

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर हंगामा बरपा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और चुनाव आयोग (ECI) के बीच हंगामा बरपा है। 31 दिसंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में TMC के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ने बैठक के दौरान गुस्सा किया था, उंगली दिखाई थी। उन्होंने CEC को 'नॉमिनेटेड अधिकारी' बताते हुए खुद को 'निर्वाचित प्रतिनिधि' कहा और बैठक की CCTV फुटेज जारी करने की चुनौती दी। 

TMC और चुनाव आयोग में तकरार क्यों?

TMC ने SIR को BJP की मदद से 'वोट चोरी' करने का जरिया बताया। ड्राफ्ट रोल में 58 लाख नाम हटाए गए। TMC ने इस श्रेणी की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। टीएमसी का कहना है कि बंगाल को घुसपैठ के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि यदि अंतिम सूची में विसंगतियां रहीं तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।

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क्या आरोप लग रहे हैं?

चुनाव आयोग ने TMC के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव कर्मियों को धमकी न दें और पश्चिम बंगाल सरकार BLOs को बढ़ा हुआ मानदेय तुरंत जारी करे। बीजेपी ने TMC के आरोपों को खारिज किया है। अब पश्चिम बंगाल में इसे लेकर और हंगामा बरपा है। यह विवाद बंगाल की मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रहा है, जहां अंतिम सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।


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