झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 12 दिनों से जेपीएससी (JPSC) परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ छात्रों का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है। इस बीच झारखंड सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत की पहल की है। बुधवार को झारखंड सरकार का प्रतिनिधिमंडल जसपाल सिंह स्टेडियम पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल एसडीएम और एसडीओ ने छात्रों से बातचीत की। छात्र मामले की सीबीआई जांच पर अड़े है। इस बीच एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर सवाल उठाया और देश की शीर्ष अदालत से मामले में दखल देने की अपील की।
आज तक से बातचीत में जेपीएससी प्रीलिम्स निकाल चुके छात्र ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की खामोशी चुभ रही है। शीर्ष अदालत कुत्तों के मामले का स्वत: संज्ञान ले सकती है तो छात्रों के मामले में क्यों नहीं ले रही। हम भी तो उनके बच्चे हैं।
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'आप की खामोशी चुभ रही'
अपनी बातचीत में छात्र ने कहा, 'मेरी सुप्रीम कोर्ट से अपील है कि आप महामहिम भीष्म और गुरु द्रोण की तरह मूकदर्शक बनना छोड़ दीजिए। एक सांविधानिक संस्था का चीरहरण हो गया। आप की खामोशी हमें चुभ रही है।
छात्र ने आगे कहा, 'अफजल गुरु के लिए रात में तीन बजे सुप्रीम कोर्ट खोल सकते हैं। कुत्तों के लिए स्वत: संज्ञान ले सकते हैं तो हमें क्या कुत्ता बनना पड़ेगा।' छात्र ने परीक्षा में हुई धांधली के मामले में सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग की।
पेपर लीक राष्ट्रीय समस्या:
हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सिर्फ राज्य का नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय समस्या है। उनकी सरकार छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम हेमंत सोरेन का यह बयान मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले आया है।
हेमंत सोरेन ने एक्स पर लिखा, 'मेरे युवा दोस्तों की चिंताएं हमारे लिए बहुत गंभीर मामला है। कथित पेपर लीक सिर्फ झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश भर के कई राज्यों के युवाओं के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या बन गया है। हमारी सरकार इस मामले पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है।'
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'गंभीरता से सुनी जाएगी हर बात'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारा मकसद सिर्फ जांच करना नहीं, बल्कि अपने युवा दोस्तों को पूरी तरह से समाधान देना है। झारखंड सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। कोई भी छात्र या अभ्यर्थी, जिसकी कोई मांग या सुझाव हो, वह राज्य सरकार के सामने अपनी बात रख सकता है। उनकी हर बात पूरी गंभीरता से सुनी जाएगी।'