भारत ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक नक्शे में 27 जगहों और भौगोलिक स्थानों को नए तरीके से दर्ज किया है। इनमें चार पहाड़ी दर्रे, एक ऊंचाई पर स्थित झील, 21 दूसरे भौगोलिक स्थान और एक युद्ध स्मारक शामिल हैं। यह काम केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किया है।
नक्शे में शामिल कई जगहें भारत-चीन सीमा के करीब हैं और 1959 तथा 1962 के सीमा संघर्षों से जुड़ी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नक्शे के अपडेट के साथ भारत-चीन की सीमा भी बदल गई है? जवाब है नहीं। भारत ने अपनी मौजूदा सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है। इन जगहों की पहचान, नाम और स्थिति को भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक नक्शे पर स्पष्ट किया गया है।
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नक्शे में क्या बदला?
सरकार के मुताबिक, आधिकारिक मैप में चार पहाड़ी दर्रों शामिल किया गया है। इसमें जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थाग ला शामिल हैं। इसके अलावा, ऊंचाई पर स्थित सम्भो सरोवर को भी मैप में दर्ज किया गया है। मैप में 21 दूसरी जगहों को भी शामिल किया गया है। इनमें लोंगजू, माजा, बीसा, बारा कुंडुन, छोटा कुंडुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, टेरीटनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बारा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कमलांग नगर शामिल हैं। इसके अलावा, शेर-ए-थापा स्मारक को भी आधिकारिक मैप में जगह दी गई है।
1962 के युद्ध से जुड़े हैं कई स्थान
कुछ जगहों का रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। थाग ला का नाम 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती दौर से जुड़ा है। लोंगजू एलएसी के पास है और 1959 में भारत-चीन के बीच हुए सीमा विवाद से इसका संबंध है। वहीं जसवंत गढ़ और शेर-ए-थापा स्मारक 1962 के युद्ध में भारतीय सैनिकों की बहादुरी और बलिदान की याद दिलाते हैं। जयरामपुर भी पूर्वी अरुणाचल और म्यांमार सीमा की तरफ जाने वाले रास्ते के कारण रणनीतिक रूप से काफी अहम है।
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चीन अरुणाचल को क्यों अपना बताता है?
चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है। वह अरुणाचल को जांगनान या दक्षिण तिब्बत कहता है। हालांकि, भारत चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है। चीन इससे पहले भी 2017, 2021 और 2023 में अरुणाचल प्रदेश की कई जगहों के अपने हिसाब से नाम जारी कर चुका है। भारत ने चीन के इन नामों को कभी स्वीकार नहीं किया।
ऐसे में नए नक्शे में अरुणाचल प्रदेश की जगहों के भारतीय नामों को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया जाना इस विवाद के बीच काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, सिर्फ नक्शे में किसी जगह का नाम दर्ज करने से जमीन पर वास्तविक स्थिति या नियंत्रण नहीं बदलता। सीमा विवाद में सिर्फ नक्शे ही नहीं, बल्कि किसी इलाके में सैन्य मौजूदगी, प्रशासनिक नियंत्रण, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं और कूटनीतिक स्थिति भी काफी महत्वपूर्ण होती हैं।
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अभी क्यों हुआ नक्शे का अपडेट?
यह अपडेट ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और चीन सीमा विवाद के बीच अपने रिश्तों को बेहतर और स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। 6 अगस्त को नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच सीमा मामलों को लेकर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य-प्रणाली की 36वीं बैठक हुई। इस बैठक में सीमा प्रबंधन और LAC पर शांति बनाए रखने को लेकर चर्चा हुई।
वहीं, सितंबर में नई दिल्ली में BRICS बैठक भी होने वाला है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में इस नक्शे को भारत की सीमा में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह दरअसल संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की आधिकारिक पहचान को और मजबूत करने और भारत के मौजूदा सीमा दावे को साफ तौर पर सामने रखने की एक कवायद है।