उत्तर प्रदेश की प्रयागराज पुलिस ने अदालत के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दोनों पर पिछले साल माघ मेले के दौरान एक नाबालिग समेत दो लोगों के यौन शोषण का आरोप है। दोनों लोगों के विरुद्ध मामला पोक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने कहा, 'अचानक कुछ लोग सम्मान देने के लिए निकल पड़े हैं। जिस समय शिखा को पकड़कर अपमानित किया जा रहा था, उस समय ये लोग कहा थे। उसी समय उन्हें संगम किनारे जाना चाहिए था। हमारे पूज्यनीय शंकराचार्य जी वहां कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे। उस समय सर्दी पीक पर थी। अब तक का हमारा जो इतिहास और पौराणिक व सनातनी व्यवस्था में कहीं किसी शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका नहीं गया होगा, लेकिन यह पहली बार हुआ है, इस सरकार में उन्हें स्नान करने से रोका गया। वे हमारे अध्यात्म और सनातन धर्म की त्रिवेणी है।'
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सपा अध्यक्ष ने आगे कहा, अब तो यह सरकार एक कदम और आगे निकल गई। लगता है कि ये अंधेरे में या रात में फिल्म '20 साल बाद' फिल्म देखते हैं। हर बात इनको 20 साल बाद पता लगती है। शंकराचार्य जी को अपमानित करने के लिए कहां और किसको ढूंढकर लाए हैं।'
एफआईआर के मुताबिक स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और नाबालिग ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया।
'रामभद्राचार्य को मुझे जेल भेज देना चाहिए'
इस पर अखिलेश यादव ने कहा, 'आदरणीय पूज्यनीय सम्मानित रामभद्राचार्य के बारे में हमें कुछ बोलना नहीं चाहिए। अगर यह (शिकायत दर्ज कराने वाला) उनका चेला है तो मुझसे एक गलती हुई है। हमने कभी रामभद्राचार्य पर से चार सौ बीसी का मुकदमा वापस लिया था। मुझे उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।'
'सरकार बचनने वाली नहीं है'
उन्होंने कहा, 'कभी किसी विचारों को लेकर झगड़े हो जाते हैं, लेकिन आप इस सीमा पर चले जाए कि इस तरह का घटिया आरोप लगवाएंगे। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि यह सरकार बचने वाली नहीं है। जनता ने तो सरकार को अस्वीकार कर दिया है। अब बस जनता इंतजार कर रही है कि कब वोट डालने का मौका मिलेगा।'
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कोर्ट के आदेश पर क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?
कोर्ट के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके खिलाफ मामला झूठा है। कथित कामों के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। मामला दर्ज होने के बाद ही फैक्ट्स सामने आएंगे। हम कोर्ट से कहना चाहेंगे कि इस प्रक्रिया में ज्यादा देर न करें और तेजी से काम करें, क्योंकि बहुत से लोग इस पर नजर रख रहे हैं।