अखिल गोगोई की कांग्रेस को आखिरी चेतावनी! आखिर उनकी डिमांड क्या है?
इस चुनाव में कांग्रेस पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह राज्य की 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी की 26 सीटें अपने गठबंधन के सहयोगियों के लिए छोड़ी है।

अखिल गोगोई। Photo Credit- PTI
असम विधानसभा चुनाव में अब बस कुछ ही शेष है। चुनाव आयोग इस महीने के आखिर में चुनावी तारीखों का ऐलान कर सकता है। इसको देखते हुए राज्य में चुनाव लड़ रहे सभी राजनीतिक दल संभावनाएं तलाशते हुए अंतिम दौर में पहुंच चुके हैं। ऐसे में असम में तमाम गठबंधन बनने भी सकते हैं और बिगड़ भी सकते हैं। इन्हीं चर्चाओं के बीच सामाजिक कार्यकर्ता से राजनेता बने विधायक अखिल गोगोई की असम में तेजी से बात होने लगी है। गोगोई इन दिनों असम की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा में हैं।
दरअसल, असम में अखिल गोगोई की पार्टी रायजोर दल (Raijor Dal) और कांग्रेस के बीच 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की बात चल रही है। मगर, अभी यह गठबंधन पर पूरी तरह बात नहीं बन पाई है। सीट शेयरिंग को लेकर अखिल गोगोई की असम के लिए कांग्रेस प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गोरव गोगोई के सा बातचीत हो चुकी है, लेकिन दोनों दलों के बीच सीट-शेयरिंग को लेकर काफी तनाव और विवाद है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर दोनों के बीच किन बातों को लेकर विवाद है और राजयोर दल कांग्रेस से कितनी सीटों की डिमांड कर रही है...
कांग्रेस के साथ गठबंधन चाहते अखिल
रायजोर दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं अखिल गोगोई। वह विपक्षी एकता के पक्ष में हैं और बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते हैं। अखिल गोगोई की पार्टी 2021 के असम विधानसभा चुनाव में पहली बार लड़ी थी। पिछले विधानसभा चुनाव में रायजोर दल ने कुल 29 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को केवल एक सीट मिली थी, जो खुद अखिल गोगोई जीते थे। वह शिवसागर विधानसभा क्षेत्र से जीतकर विधानसभा पहुंच थे।
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जब अखिल गोगोई चुनाव जीते तो वह CAA विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में जेल में बंद थे। इसके अलावा राजयोर दल का कुल प्रदर्शन सीमित रहा था। गोगोई की पार्टी मुख्य तौर से विपक्षी दलों के बीच वोट कटवा के रूप में चर्चा में रही। कुछ विधानसभा सीटों में उनकी पार्टी के वोट बीजेपी की जीत के अंतर से ज्यादा थे, जिससे कांग्रेस को नुकसान पहुंचा माना जाता है।
अखिल गोगोई कांग्रेस से क्या चाहते हैं?
दरअसल, अखिल गोगोई ने इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से कम से कम 12-15 विधानसभा सीटें मांगी है। इसमें वह खासकर अपनी पसंद की और जीतने वाली सीटों की डिमांड कर रहे हैं। मगर, कांग्रेस ने अभी तक उनको सिर्फ 4 सीटें ऑफर की हैं। अखिल गोगोई इसी बात से नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने 21 फरवरी को कहा है कि उनकी पार्टी ऊपरी असम में कांग्रेस से ज्यादा मजबूत है और अगर मांग पूरी नहीं हुई तो गठबंधन पर आखिरी फैसला लेंगे।
यह फैसला असम विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन पर विचार-विमर्श के लिए बुलाई गई राजयोर दल की इमरजेंसी मीटिंग में लिया गया। मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए, गोगोई ने कहा कि पार्टी सदस्यों ने उन्हें कांग्रेस के साथ बातचीत करने और पार्टी कार्यकर्ताओं की हकदार 15 सीटें हासिल करने का पूरा अधिकार दिया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी कैडर ने कांग्रेस द्वारा अब तक बांटी गई सीटों से नाखुशी जताई है। साथ ही कांग्रेस की राज्य लीडरशिप के साथ फिर से बातचीत करने का आग्रह किया है। गोगोई ने कहा, 'हम हमेशा गठबंधन के पक्ष में रहे हैं और आगे भी रहेंगे। लेकिन सीट-शेयरिंग लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए।'
15 सीटें नहीं दी तो क्या होगा?
उन्होंने कहा, 'अगर रायजोर दल की जरूरत के हिसाब से 15 सीटें नहीं दी जाती हैं तो मुझे गठबंधन पर फिर से सोचने का अधिकार दिया गया है। अब गेंद कांग्रेस के पाले में है और उसे विचार करना है।' हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह 15 सीटें देने को तैयार है, लेकिन असहमति खास चुनाव क्षेत्रों को लेकर है। उन्होंने कहा, 'हमारी पसंद के हिसाब से हमें अब तक सिर्फ चार सीटें दी गई हैं। हम अपनी पसंद की 15 सीटें चाहते हैं। अगर नहीं, तो कम से कम 12 सीटें चाहिए।'
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कांग्रेस 100 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
इस चुनाव में कांग्रेस पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह राज्य की 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बाकी की 26 सीटें अपने गठबंधन के सहयोगियों के लिए छोड़ी है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में 6 राजनीतिक दल हैं, जिसमें सभी की सम्मान देना है। कांग्रेस के 100 सीटों पर चुनाव लड़ने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए अखिल गोगोई ने कहा कि अगर गठबंधन के साथियों को सही हिस्सा नहीं दिया जाता है तो ऐसा तरीका स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने पिछले चुनाव के आंकड़ों की ओर इशारा करते हुए कहा, 'हमने सुना है कि छह पार्टियों के बीच 26 सीटें बराबर नहीं हैं। कांग्रेस हमेशा ज्यादातर सीटें जीतती है।' 2016 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 122 सीटों पर चुनाव लड़ा और 26 जीतीं। इसके बाद 2021 वाले चुनाव में उसने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा और 29 जीतीं।'
अखिल गोगोई ने लिखा पत्र
उन्होंने कहा, 'सरकार बनाने के लिए कम से कम 60 सीटें जीतनी होंगी। अगर यही फॉर्मूला दोहराया गया तो गठबंधन का सफल होना मुश्किल होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई को सीट-शेयरिंग पर स्पष्टता के लिए पत्र लिखा था लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं मिला है। हालांकि, अखिल गोगोई ने अगले कुछ दिनों में पॉजिटिव नतीजे की उम्मीद जताई है।
ऐसे में बातचीत के अहम दौर में पहुंचने के साथ ही रायजोर दल के नए प्रस्ताव ने कांग्रेस पर अपने सीट-शेयरिंग फॉर्मूले को फिर से तय करने का दबाव बढ़ा दिया है। अगर ऐसा नहीं होता है तो विपक्षी गठबंधन में दरार का खतरा बढ़ेगा।
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