दशहरी आम के लिए दुनियाभर में मशहूर मलिहाबाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है एक नई और अनोखी आम की किस्म, जिसे 'मोदी मैंगो' नाम दिया गया है। मलिहाबाद के नबीपनाह गांव के बागवान उपेंद्र कुमार सिंह ने करीब तीन वर्षों की मेहनत के बाद इस विशेष किस्म को विकसित किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मिठास अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसकी खुशबू बेहद आकर्षक और अलग पहचान रखने वाली है।
उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) की तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन की मदद से इस नई किस्म को तैयार किया। वर्ष 2023 में 'मोदी मैंगो' को आधिकारिक रूप से केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में पंजीकृत कराया गया था। इस वर्ष इसकी पैदावार अच्छी हुई है और पेड़ों पर एक समान आकार के खूबसूरत आम लदे हुए दिखाई दे रहे हैं।
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एक जैसे आकार के हैं सभी आम
मोदी मैंगो देखने में जितना आकर्षक है, उसके गुण भी उतने ही खास हैं। इस किस्म के लगभग सभी आम एक जैसे आकार और बनावट के होते हैं। एक आम का वजन करीब 300 से 500 ग्राम तक होता है, जो इसे सामान्य आमों से अलग बनाता है। यही वजह है कि यह बाजार में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच सकता है।
कम मिठास, लेकिन शानदार खुशबू
आमतौर पर आम अपनी अधिक मिठास के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मोदी मैंगो की मिठास अपेक्षाकृत कम है। यही वजह है कि यह उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है जो कम मीठे फल पसंद करते हैं। वहीं इसकी मनमोहक खुशबू इसे और भी खास बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सुगंध ग्राहकों को आकर्षित कर सकती है।
पहले भी नेताओं के नाम पर विकसित हो चुकी हैं किस्में
गौरतलब है कि मलिहाबाद में इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी आम की विशेष किस्में विकसित की जा चुकी हैं। अब मोदी मैंगो ने आम उत्पादकों के साथ-साथ आम प्रेमियों के बीच भी उत्सुकता बढ़ा दी है।
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बाजार में बना सकता है अलग पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उपलब्ध होने के बाद यह नई किस्म अपनी अलग पहचान बना सकती है। कम मिठास और अधिक खुशबू की वजह से मोदी मैंगो उन उपभोक्ताओं को पसंद आ सकता है जो पारंपरिक स्वाद से कुछ अलग तलाश रहे हैं। इससे मलिहाबाद की आम उत्पादन परंपरा को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।