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राजस्थान में रण बना पांचना बांध विवाद, जातीय तनाव का कैसे ले रहा रूप?

करौली जिले के पांचना बांध को लेकर विरोध-प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। जिले में हजारों की संख्या में लोग बांध के पानी को छोड़ने की मांग कर रहे हैं। इस पूरे विवाद के बारे में जानने के लिए यह स्टोरी पढ़िए...

Panchana Dam controversy

पांचना बांध के पानी के लिए आंदोलन करते लोग। Photo Credit- Social Media

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राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध है। इस बांध के पानी को रोक दिया गया है, जबकि राजस्थान हाई कोर्ट ने इसके पानी को नहरों में छोड़ने का आदेश दिया है। मगर, इसके पानी के बंटवारे को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद पैदा हो गया है। पांचना बांध का विवाद अब केवल सिंचाई का नहीं, बल्कि कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। 39 गांवों के लोग एक महीने से ज्यादा समय से बांध के पास पहरा दे रहे हैं। इस पहरे की वजह मई में आया हाईकोर्ट का आदेश है, जिसमें सरकार को आदेश दिया गया था कि बांध का पानी जल्द कमांड क्षेत्र की नहर में छोड़ा जाए।

 

पांचना बांध को लेकर अब दर्जनों गांवों के हजारों लोग विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कूद पड़े हैं। उन्होंने चेताया कि अगर समय रहते पांचना बांध विवाद को नहीं सुलझाया गया को यह जातीय तनाव का रूप ले सकता है। गहलोत ने राज्य की बीजेपी सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। साथ ही विवाद की वजह से आमने-सामने आए गुर्जर और मीणा समुदायों के बीच बातचीत कराकर समाधान निकालने की अपील की है।

 

वहीं, बीजेपी सरकार की चुनौती बन गई है कि एक तरफ हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करना है और दूसरी तरफ विरोध कर रहे गांवों को शांत रखना है।

 

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विवाद की जड़ में 74 गांव

पांचना बांध की विवाद की जड़ में इसके आसपास बड़े कुल 74 गांव हैं। यह गांव दो खेमों में बंटे हैं। 74 में से 39 गांव बांध के डूब क्षेत्र में आते हैं। यही लोग बांध के पानी को छोड़ने का विरोध कर रहे हैं। वहीं, 35 गांवों के किसान नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी फसलों की सिंचाई हो सके।

पांचना बांध पर विवाद क्या है?

दरअसल, पांचना बांध से पानी छोड़े जाने को लेकर पिछले कुछ हफ्ते से विवाद गहरा गया है। बांध के आसपास कई गांव हैं। मुख्य रूप से बांध के ऊपरी हिस्से में रहने वाले अधिकतर लोग गुर्जर समुदाय से संबंध रखते हैं। यह गुर्जर समुदाय बांध के पानी पर अपना अधिकार जमाकर दावा ठोंक रहा है। यह लोग पानी पर अपने अधिकार का हवाला देते हुए पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं।

 

वहीं, दूसरी तरफ निचले इलाकों में भी दर्जनों गांव आते हैं। इन क्षेत्रों में अधिकांश मीणा समुदाय से हैं। यह समुदाय किसान हैं, जो पांचना बांध के पानी पर अपनी खेती के लिए निर्भर रहते हैं। मीणा समुदाय अपने खेतों की सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं। इसी गतिरोध की वजह गुर्जर और मीणा समुदाय विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। 

 

 

 

 

हजारों की संख्या में लोग करौली-गंगापुर सिटी सीमा के पास धरना दे रहे हैं। यह बांध पूर्वी राजस्थान के करौली जिले में मौजूद है। इस पूरे क्षेत्र में गुर्जर और मीणा दोनों समुदायों की बड़ी आबादी रहती है।

गंगापुर सिटी विधायक ने क्या कहा?

गंगापुर सिटी से कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा ने कहा कि पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर आंदोलन दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है और इसमें हजारों किसान भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों के समर्थन से आंदोलन को और मजबूती मिली है। उन्होंने मांग की कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बांध से पानी छोड़ा जाना चाहिए।

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने क्या कहा?

इस मामले पर राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का कहना है, 'मुख्यमंत्री से मिलकर मैंने पांचना बांध के हालात पर चर्चा की और बांध की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की है। हाईकोर्ट के आदेशों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वर्षों से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पानी उपलब्ध नहीं होने से 9,985 हेक्टेयर भूमि सिंचाई से वंचित है और करीब 35 गांवों के 1.25 लाख से अधिक नागरिक प्रभावित हो रहे हैं।'

 

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पूर्व सीएम ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

वहीं, पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है और समुदायों के बीच टकराव की परिस्थितियां पैदा कर रहा है। उनका कहना है, 'सरकार जिस तरह काम कर रही है, उससे लगता है कि ऐसी स्थिति जानबूझकर बनने दी जा रही है। पांचना बांध के मुद्दे पर पहले से ही समुदायों के बीच तनाव है। सरकार को दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों, पंच-पटेलों और जनप्रतिनिधियों को बुलाकर समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए था।'

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गहलोत ने आरोप लगाया है कि लगभग दो से तीन सप्ताह से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई सार्थक संवाद शुरू नहीं किया गया है। उन्होंनें कहा है, 'कम से कम दोनों पक्षों को साथ बैठाने और समाधान तलाशने का प्रयास तो किया जाना चाहिए था। उच्च न्यायालय लगातार निर्देश दे रहा है और अधिकारी दबाव में हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।'

खुद हस्तक्षेप करें मुख्यमंत्री

उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को खुद हस्तक्षेप करना चाहिए और ऐसी टीम बनानी चाहिए जो समय रहते चर्चा कर समाधान निकाले, ताकि मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझे और सभी को न्याय मिल सके। ऐसा नहीं होता है तो ऐसी परिस्थितियों से यह संदेश जाता है कि राज्य में शासन व्यवस्था कमजोर है।

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