संजय सिंह, पटना। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को आखिरकार कोर्ट से जमानत मिल गई। बेउर जेल की दीवारों के भीतर बिताए लंबे समय के बाद अब उनकी रिहाई तय मानी जा रही है। खबर फैलते ही मोकामा से पटना तक उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन यह सिर्फ जमानत की खबर नहीं है, बल्कि एक ऐसी कहानी का नया अध्याय है, जिसमें सत्ता, संघर्ष और सियासत का अनोखा मेल दिखता है।
कहानी शुरू होती है पिछले साल नवंबर से, जब बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर था। मोकामा का टाल इलाका राजनीतिक सरगर्मी से भरा हुआ था। उसी दौरान एक दिन अचानक गोलियों की आवाज गूंजी और दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। दुलारचंद, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। इस घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया।
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हत्या के बाद आरोपों का तीर सीधे अनंत सिंह की ओर गया। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से ठीक पहले हुई यह गिरफ्तारी किसी फिल्मी ट्विस्ट से कम नहीं थी। विरोधियों को लगा कि अब उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर पड़ जाएगी, लेकिन कहानी ने यहां एक अप्रत्याशित मोड़ लिया।
जेल से अनंत सिंह ने जीता चुनाव
जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए भी अनंत सिंह ने चुनावी मैदान नहीं छोड़ा। मोकामा की जनता ने भी उन्हें नजरअंदाज नहीं किया। जब नतीजे आए तो सभी हैरान रह गए। अनंत सिंह ने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि भारी अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने राजद की प्रत्याशी वीणा सिंह को 28 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनके राजनीतिक प्रभाव का मजबूत संदेश भी था।
एंबुलेंस से एंट्री, अनंत सिंह का सियासी संकेत
समय बीतता गया, लेकिन अनंत सिंह जेल में ही रहे। फिर हाल ही में एक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव के दौरान वह एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे। कैमरों की नजर उन पर टिकी थी और उनके शब्द सुर्खियों में छा गए। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहे तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने इशारा दिया कि अब उनके बेटे राजनीति में कदम रख सकते हैं।
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बेल के बाद अगला कदम क्या होगा?
अब जब कोर्ट से जमानत मिल गई है तो सवाल यह है कि आगे क्या होगा? क्या अनंत सिंह पहले की तरह सक्रिय राजनीति में लौटेंगे या पर्दे के पीछे रहकर नई रणनीति बनाएंगे? मोकामा की सियासत में उनका अगला कदम क्या होगा। फिलहाल, बेउर जेल के बाहर नजरें टिकी हैं। समर्थकों को उस पल का इंतजार है, जब अनंत सिंह बाहर आएंगे।