कुल्लू की पहाड़ियों में नशे के अवैध कारोबार की जड़ों पर प्रहार करने के लिए इस बार बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया। करीब डेढ़ महीने तक चली कार्रवाई में लगभग 1300 हेक्टेयर भूमि पर फैली अवैध भांग की खेती को चिन्हित कर नष्ट किया गया। 9 सितंबर से 24 अक्टूबर 2026 तक चले इस अभियान में विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और वन क्षेत्रों तक पहुंचीं। इस दौरान सिर्फ भांग की खेती नष्ट करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि अवैध खेती से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की गई। सितंबर और अक्टूबर के दौरान जिला कुल्लू के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में कुल 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें सबसे अधिक पांच मामले मणिकर्ण थाना क्षेत्र में दर्ज हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, अवैध भांग की खेती के खिलाफ अभियान में पतलीकूहल और मणिकर्ण थाना क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन इलाकों में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहाड़ी भूभाग और दुर्गम रास्तों के कारण कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण रहता है। पतलीकूहल थाना क्षेत्र में नग्गर, फोजल, हलाण, नेरी, जौलांग, मेहा, खखनाल, मंडलगढ़, सरसी, सोयल, नाथन, पनकोट, जना, केशरी हाल, थाच, खराल, रुमसू और सजला सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई की गई। वहीं, मणिकर्ण थाना क्षेत्र में कसोल वन परिक्षेत्र और आसपास के इलाकों में अभियान चलाया गया। ग्राहण, मलाणा, विचिंग, तोष, कुटला, बरशैणी, रशोल, पुलगा और मणिकर्ण सहित कई क्षेत्रों में अवैध भांग की खेती को चिन्हित कर नष्ट किया गया।
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किस थाने में कितनी FIR?
सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान अवैध भांग की खेती से संबंधित मामलों में पुलिस थाना-वार दर्ज एफआईआर का विवरण इस प्रकार है:
- मणिकर्ण: 5 मामले
- पतलीकूहल: 2 मामले
- सैंज: 2 मामले
- सदर कुल्लू: 2 मामले
- भुंतर: 1 मामला
- बंजार: 1 मामला
इस तरह कुल 13 मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले जिले के छह पुलिस थाना क्षेत्रों से संबंधित हैं। दर्ज एफआईआर की संख्या कानूनी कार्रवाई का आंकड़ा है, जबकि 1300 हेक्टेयर में खेती नष्ट करने का आंकड़ा अभियान के भौगोलिक दायरे को दर्शाता है। दोनों आंकड़े अलग-अलग हैं।
छह एजेंसियां एक साथ, जंगलों और पहाड़ों तक पहुंचीं टीमें
इस अभियान को अंजाम देने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), वन विभाग, जिला पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अलग-अलग विभागों के समन्वय से संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां कार्रवाई की गई। अभियान का उद्देश्य अवैध भांग की खेती को खत्म करने के साथ मादक पदार्थों के अवैध उत्पादन और आपूर्ति के स्रोतों पर अंकुश लगाना रहा।
लगभग 1300 हेक्टेयर का क्षेत्रफल करीब 13 वर्ग किलोमीटर के बराबर है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इतनी जमीन पर लगातार एक ही भूखंड में भांग उगाई जा रही थी। यह अभियान के दौरान चिन्हित और नष्ट की गई खेती के कुल क्षेत्रफल का बताया गया आंकड़ा है। यह आंकड़ा कुल्लू में अवैध भांग की खेती के खिलाफ अभियान के व्यापक दायरे को सामने लाता है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जिले में अवैध खेती पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसके लिए आगे की निगरानी और कार्रवाई भी अहम होगी।
अभियान में अब आगे क्या?
जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध भांग की खेती, मादक पदार्थों के उत्पादन और तस्करी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अपने आसपास अवैध भांग की खेती या नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी संबंधित विभागों को दें। कुल्लू में इस अभियान का अगला इम्तिहान यही होगा कि दुर्गम इलाकों में नष्ट की गई खेती वाले क्षेत्रों में दोबारा अवैध खेती न हो और नशे के अवैध कारोबार पर स्थायी अंकुश लगाने के लिए निगरानी कितनी प्रभावी रहती है।