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RJD, JDU फिर BJP, पिता सात बार के विधायक; कौन हैं बिहार के नए CM सम्राट चौधरी?

बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद सम्राट चौधरी को बिहार का नया सीएम बना दिया गया है। वह एक राजनीतिक परिवार से हैं और आरजेडी, जेडीयू में भी रह चुके हैं।

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सम्राट चौधरी । Photo Credit: Social Media

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बिहार की राजनीति ने कई दिनों की उथल-पुथल के बाद सीएम को लेकर अंतिम परिणति तक पहुंच गई है और सम्राट चौधरी को बिहार का अगला सीएम नियुक्त किया गया है। नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद अब सम्राट चौधरी बिहार के अगले सीएम बनेंगे। बीजेपी के भीतर उनका बढ़ता कद, संगठन पर पकड़ और सामाजिक समीकरणों में उनकी भूमिका उन्हें इस दौड़ का मजबूत दावेदार बनाया है। बिहार में जब से सत्ता परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हुई थीं तब से ही सम्राट चौधरी का नाम सीएम पद के लिए बार-बार सामने आ रहा था।। 

 

सम्राट चौधरी ने छात्र राजनीति से लेकर राज्य की सत्ता के केंद्र तक का सफर तय किया है, उनका राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव, दल-बदल और विवादों से भी गुजरता रहा है। हाल-फिलहाल में बिहार की राजनीति में उनका कद काफी ऊंचा उठ गया है।

 

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पिता सात बार के विधायक

सम्राट चौधरी राजनीतिक परिवार से हैं। उनके पिता शकुनि चौधरी राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम रहे हैं और कई बार विधायक भी रह चुके हैं। उनके पिता शकुनि चौधरी और मां पार्वती देवी दोनों राजनीति से जुड़े रहे हैं। शकुनि चौधरी सात बार के विधायक और सांसद भी रह चुके हैं जबकि उनकी मां पार्वती देवी तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। यही फैमिली बैकग्राउंड सम्राट चौधरी के लिए राजनीति में प्रवेश का आधार बनी। हालांकि, उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने अपनी पहचान केवल विरासत के सहारे नहीं बनाई, बल्कि खुद के राजनीतिक कौशल और संगठनात्मक क्षमता के दम पर आगे बढ़े।

RJD से की शुरुआत

सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई। वह शुरुआती दौर में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े और युवा नेता के रूप में उभरे। लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में आरजेडी उस समय बिहार की प्रमुख राजनीतिक ताकत थी और सम्राट चौधरी को भी इस मंच से पहचान मिली। हालांकि, समय के साथ उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली और नई राजनीतिक संभावनाओं की तलाश शुरू की।

 

इसके बाद उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का रुख किया, जहां उन्हें सत्ता और संगठन दोनों में काम करने का मौका मिला। जेडीयू में रहते हुए उन्होंने मंत्री पद भी संभाला और सत्ता का अनुभव हासिल किया लेकिन बिहार की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच यह भी उनका स्थायी राजनीतिक ठिकाना साबित नहीं हो सका।

थामा बीजेपी का दामन

आखिरकार, 2017 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामा, जो उनके राजनीतिक करियर का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा। पार्टी ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां दीं और बाद में बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया। इस भूमिका में उन्होंने पार्टी को मजबूत करने, विशेषकर ओबीसी और कुर्मी-कोइरी वोट बैंक में पैठ बनाने की दिशा में काम किया।


2024 में बिहार की नई सरकार बनने के बाद सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया गया। इस पद ने उनकी बीजेपी में उनकी राजनीतिक स्थिति को और भी ज्यादा मजबूत किया। विधानसभा चुनाव के वक्त भी सम्राट चौधरी बीजेपी के मुख्य चेहरे के रूप में थे।

विवादों से घिरे रहे

हालांकि, सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा है। उनका दल-बदल कई बार सवालों के घेरे में रहा है और विरोधी उन्हें अवसरवादी नेता के रूप में पेश करते हैं। इसके अलावा, कुछ बयानों को लेकर भी वह चर्चा में रहे हैं, जिन पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। खासकर नीतीश कुमार के खिलाफ उनके आक्रामक तेवर और राजनीतिक बयानबाजी ने उन्हें सुर्खियों में रखा।


एक और दिलचस्प पहलू उनका ‘पगड़ी’ वाला संकल्प रहा, जिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से हटाया नहीं जाएगा, तब तक वह अपनी पगड़ी नहीं उतारेंगे। हालांकि, जब नीतीश कुमार ने आरजेडी का साथ छोड़कर दोबारा बीजेपी का दामन थाम लिया था जब उन्होंने पगड़ी उतार दी थी। उनका कहना था कि अब वह उनके सीएम हो गए हैं।

 

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डिग्री को लेकर विवाद

विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी डिग्री को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर ने उनके ऊपर 10वीं पास न होने का आरोप लगाया था। इसको लेकर सम्राट चौधरी ने सफाई दी थी। साथ ही सम्राट चौधरी के ऊपर हत्या करवाने का आरोप भी प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव के दौरान लगाया था।

 


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